इटावा , अप्रैल 12 -- उत्तर प्रदेश के इटावा में लाइन सफारी के पास निर्माणाधीन केदारेश्वर महादेव मंदिर इन दिनों धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का भी केंद्र बना हुआ है।
महाभारत कालीन सभ्यता से जुड़े इस क्षेत्र में बन रहा यह मंदिर एक बड़े धार्मिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं।
समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा बनवाए जा रहे इस मंदिर को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि यह पहल भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व एजेंडे के समानांतर समाजवादी पार्टी की नई सांस्कृतिक और वैचारिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
श्री यादव ने सोशल मीडिया पर कहा, " केदारेश्वर महादेव मंदिर निर्माणाधीन है, रखिए आना विचाराधीन।" उन्होंने मंदिर को ईश्वरीय प्रेरणा से संपूर्णता की ओर अग्रसर बताते हुए कहा कि यह स्थान आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 'शिवशक्ति अक्ष रेखा' पर स्थित है।
उनके अनुसार, शिव के प्रमुख आठ मंदिरों और पंचभूत स्थलों की तरह यह स्थल भी विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर एक भव्य शिवधाम के रूप में विकसित हो रहा है और महादेव की कृपा सभी दर्शनार्थियों पर बनी रहे।
राजनीतिक हलकों में इस मंदिर निर्माण को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे के सहारे समाजवादी पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। अब मंदिर निर्माण को पार्टी की सामाजिक और सांस्कृतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम अखिलेश यादव की छवि को व्यापक बनाने का प्रयास हो सकता है, ताकि उन्हें केवल जातीय या अल्पसंख्यक राजनीति तक सीमित न देखा जाए।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव गोपाल यादव ने कहा कि केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह अन्य नेताओं के लिए भी संदेश है। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र का विकास होगा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि मंदिर बनने से क्षेत्र में सड़क, पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मंदिर परिसर भविष्य में इटावा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो सकता है।
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