यरूशलम , अक्टूबर 23 -- इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी और इज़रायल रक्षा बल (आईडीएफ) के पूर्व प्रमुख गादी आइज़ेनकोट की नवनिर्मित मध्यमार्गी यैशार पार्टी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।

सर्वेक्षण के मुताबिक 120 सीटों वाली 'नेसेट' में किसी भी पक्ष को बहुमत मिलने की संभावना नहीं है। इजरायल में 14 और 15 अक्टूबर को 500 यहूदी और अरब लोगों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में यहूदियों के नेतृत्व वाले दोनों मुख्य गुटों को 51-51 सीटें मिलने का अनुमान है, जो सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 61 सीटों के आंकड़े से काफी कम है। अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों को कुल मिलाकर 14 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि किसी भी गुट में शामिल न होने वाली 'रिज़र्विसिस्ट्स' पार्टी को चार सीटें मिल सकती हैं। दोनों में से कोई भी खेमा तब तक बहुमत हासिल नहीं कर पाएगा, जब तक कि वे चुनाव प्रचार के दौरान किए गए उन वादों से पीछे न हटें, जिनमें उन्होंने कुछ प्रतिद्वंद्वी गुटों के साथ मिलकर सरकार न बनाने की बात कही थी। अगर कोई गठबंधन नहीं बन पाता है, तो 2027 की आरंभ में फिर से चुनाव हो सकते हैं और इस दौरान श्री नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

'टाइम्स ऑफ़ इज़रायल' के एक अलग सर्वेक्षण में पाया गया कि अगर नेतन्याहू सरकार बनाने में विफल रहते हैं, तो लगभग 60 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि वे राजनीति से संन्यास ले लें। पार्टी-वार अनुमानों के अनुसार विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट की 'यैशार' पार्टी 23 सीटों के साथ पहले स्थान पर है (जो पिछले सप्ताह की तुलना में तीन सीटें कम हैं)। वहीं नेतन्याहू की 'लिकुड' पार्टी 21 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रधानमंत्री का समर्थन किये जाने के कुछ दिनों बाद लिकुड की सीटों में एक सीट का इज़ाफ़ा हुआ है।

पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की 'बी'याचाद' पार्टी को 11 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि कट्टरपंथी 'इज़रायल बेतेनु' को 9 सीटें मिल सकती हैं। अरब-नेतृत्व वाली 'जॉइंट लिस्ट' को भी 9 सीटें मिलने की संभावना है। अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स 'शास' और 'यूनाइटेड तोराह जुडाइज़्म' पार्टियां, वामपंथी 'द डेमोक्रेट्स' और धुर-दक्षिणपंथी 'ओत्ज़मा येहुदित' में से प्रत्येक को 8-8 सीटें मिलने का अनुमान है। अनुमान है कि 'रिलिजियस ज़ायोनिज़्म' को 6 सीटें मिलेंगी, इसके बाद ऐतिहासिक रूप से इस्लामी 'राआम' को 5 सीटें और 'रिज़र्विसिस्ट्स' को 4 सीटें मिलने की संभावना है। ओफ़र विंटर की दक्षिणपंथी 'पीपल ऑफ़ इज़रायल' पार्टी, जिसने केवल श्री नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने का वादा किया है, उसे प्रधानमंत्री और लिकुड पार्टी के अन्य उम्मीदवारों की लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है। अनुमान है कि यह पार्टी 3.25 प्रतिशत की चुनावी सीमा को पार नहीं कर पायेगी।

जो पार्टियां इस चुनावी सीमा को पार नहीं कर पातीं, उन्हें मिलने वाले वोटों को इजरायली संसद नेसेट की सीटों के बंटवारे में नहीं गिना जाता है। श्री नेतन्याहू के विरोधियों के पास हालांकि कुल मिलाकर 65 सीटें हो सकती हैं लेकिन इस आंकड़े में अरब-बहुसंख्यक वाली दो पार्टियां भी शामिल हैं। 'यैशार' और लगभग सभी अन्य यहूदी-नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियों ने इन दोनों पार्टियों के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया है। यह तब है जब 'राआम' ने भविष्य की सरकार में शामिल होने में दिलचस्पी दिखाई है और इज़रायल को एक यहूदी राज्य के रूप में मान्यता दी है। विपक्षी पार्टियों ने यह भी वादा किया है कि वे श्री नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल नहीं होंगी। मतदान से ठीक पहले के आखिरी दिनों में भी मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रचार अभियान जारी रहा। आइज़ेनकोट 'वेस्टर्न वॉल' पर गए, जहां उन्हें वहां मौजूद लोगों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।

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