येरूशलेम , नवंबर 08 -- इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हजोर्ग ने यहां स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 'यशार' पार्टी के नेता और देश के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट को आधिकारिक तौर पर सरकार बनाने को कहा है। राष्ट्रपति ने उन्हें स्पष्ट बहुमत न होने के बावजूद सरकार गठन के लिए 28 दिन का समय दिया है।

जिम्मेदारी मिलने के बाद 66 वर्षीय श्री आइजेनकोट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सहयोगियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि अनुभवी प्रधानमंत्री देश को ऐतिहासिक संकट में ले आए हैं। उन्होंने देश के गहरे राजनीतिक तनाव को दूर करने का संकल्प लेते हुए कहा कि इजरायल इस समय आपातकालीन स्थिति से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि हमें मिलकर एक राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनानी होगी, जिसके लिए कुछ नए और अलग राजनीतिक कदम उठाने पड़ेंगे।

श्री आइजेनकोट के प्रधानमंत्री बनने की राह आसान नहीं है। उनके पास तीन विकल्प हैं- पहला, नेतन्याहू के साथ मिलकर सरकार चलाना। दूसरा, अरब दलों का समर्थन लेना (जिसका उनके गुट के कई लोग विरोध कर रहे हैं)। तीसरा, धार्मिक दलों के साथ समझौता करना, जो अपने समुदाय के लोगों को सेना में जाने से छूट देने की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रपति और श्री आइजेनकोट दोनों ने इस बात को माना है कि श्री नेतन्याहू के नेतृत्व के कारण दुनिया में इजरायल का अकेलापन बढ़ता जा रहा है।

श्री आइजेनकोट ने श्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और वित्त मंत्री बेजाएल स्मोट्रिच की दक्षिणपंथी पार्टी से भी अपील की है कि वे उन्हें प्रधानमंत्री मानकर उनके साथ आएं।

उन्होंने कहा कि जो कोई भी देश की इस गंभीर स्थिति को समझ रहा है, उसके लिए मेरा दरवाजा और हाथ हमेशा खुले हैं। इससे पहले राष्ट्रपति ने सभी दलों से बातचीत के बाद श्री आइजेनकोट के नाम पर मुहर लगाई थी। राष्ट्रपति ने बताया कि 67 सांसदों वाले दलों ने श्री आइजेनकोट का समर्थन किया, जबकि 46 सांसदों ने प्रधानमंत्री और लिकुड पार्टी के नेता बेंजामिन नेतन्याहू का समर्थन किया है। वहीं, यूनाइटेड तौरहा जुडाइज्म (UTJ) पार्टी के सात सांसदों ने किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करने से इनकार कर दिया।

राष्ट्रपति ने माना कि लिकुड सबसे बड़ा दल है, लेकिन उन्होंने अपने पुराने उदाहरणों का हवाला दिया, जब कई बार सबसे बड़े दल के बजाय दूसरे दल के नेता को सरकार बनाने का मौका दिया गया। उन्होंने ईरान के खतरे, आतंकवाद और सात अक्टूबर के जख्मों का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायल को एक ऐसी स्थिर सरकार चाहिए जो इन सबका मजबूती से सामना कर सके। श्री आइजेनकोट सोमवार को 'इजरायल बेतेनू' पार्टी के नेता एविग्डोर लिबरमैन से मिलकर इस पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।

अगर वह सरकार बनाने में विफल रहते हैं, तो यह मौका श्री नेतन्याहू को भी मिल सकता है।

इस बीच, शस पार्टी की सूची से आरी डेरी और दो अन्य सदस्य संसद से हट रहे हैं। हालांकि बहुमत का आंकड़ा जुटाना अभी भी काफी पेचीदा बना हुआ है। श्री आइजेनकोट के विपक्षी गुट में चार यहूदी दलों के 48 सांसद हैं, जबकि दो अरब दलों (जॉइंट लिस्ट और राम) के पास कुल 19 सीटें हैं। हालांकि सभी छह गुटों ने श्री आइजेनकोट का नाम आगे बढ़ाया है, लेकिन तीन यहूदी दल अरबों के समर्थन से सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

'इजरायल बेतेनू' के प्रमुख एविग्डोर लिबरमैन ने संकेत दिया है कि वे नेतन्याहू और अरब दलों के बिना सरकार बनाने तथा देश को दोबारा चुनावों में जाने से बचाने के लिए धार्मिक सैनिकों की भर्ती के मुद्दे पर कुछ "कड़े समझौते" करने को तैयार हैं।

यूटीजे के नेताओं ने भी इस पर बातचीत करने की इच्छा जताई है। इस बात से शस पार्टी की स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, शस के एक करीबी सूत्र ने कहा कि अगर धार्मिक गुरु (यूटीजे के रब्बी) किसी समझौते को मंजूरी दे देते हैं, तो शस पार्टी आइजेनकोट की सरकार का विरोध नहीं करेगी।

अंत में, 48 विपक्षी सांसद, यूटीजे के सात और शस की 6 सीटें मिलकर कुल 61 सीटों का जादुई आंकड़ा पूरा कर सकती हैं। इससे संभावना बन सकती है कि श्री आइजेनकोट को अरब दलों के समर्थन के बिना ही अपनी सरकार बनाने का रास्ता मिल जाए।

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