तेल अवीव , मार्च 31 -- इजरायल की संसद 'नैस्ट' ने एक बेहद विवादास्पद विधेयक को मंजूरी दी है, जो इजराइली नागरिकों की हत्या के दोषी वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों के लिए 'मौत की सजा' अनिवार्य बनाता है।
इस विधेयक की सबसे विवादित बात यह है कि इसमें सजा का दोहरा मापदंड रखा गया है- जहां वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी दी जायेगी, वहीं समान अपराधों के लिए इजरायली नागरिकों (यहूदियों) पर नागरिक अदालतों में मुकदमा चलेगा, जो उन्हें इस कठोर सजा के दायरे से बाहर रखता है।
'द टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के अनुसार, इस विधेयक के तहत सैन्य अदालतों में घातक आतंकी गतिविधियों के दोषी पाये गये वेस्ट बैंक के निवासियों के लिए 'फांसी की सजा' ही मुख्य सजा होगी। न्यायाधीश केवल कुछ अस्पष्ट 'विशेष परिस्थितियों' में ही उम्रकैद की सजा सुना सकेंगे।
इसके मुताबिक, सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के भीतर फांसी देनी होगी। इसे विशेष स्थिति में 180 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
120 सीटों वाली नैस्ट में सोमवार को इस विधेयक के पक्ष में 62 वोट पड़े, जिनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का वोट भी शामिल था। विपक्ष में 48 वोट पड़े और एक सदस्य मतदान से अनुपस्थित रहा।
इस विधेयक की अगुवाई धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने की थी। मतदान के बाद बेन ग्विर ने सार्वजनिक रूप से इसका जश्न मनाया और सोशल मीडिया पर लिखा, "हमने इतिहास रच दिया!!! हमने वादा किया था और उसे पूरा कर दिखाया।"इस विधेयक की हालांकि व्यापक स्तर पर निंदा की जा रही है और इसे 'भेदभावपूर्ण' बताया जा रहा है। यूरोपीय देशों, मानवाधिकार समूहों और फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने दो अलग-अलग कानूनी प्रणालियां बनाने के लिए इस कानून की कड़ी आलोचना की है।
'एसोसिएशन फॉर सिविल राइट्स इन इजरायल' इस विधेयक को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे रही है। उनका तर्क है कि यह कानून संवैधानिक और अधिकार क्षेत्र के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और राष्ट्रीयता के आधार पर असमान व्यवहार (भेदभाव) स्थापित करता है। विधेयक के समर्थकों ने हमलों के अपने व्यक्तिगत अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वे इजरायली और फिलिस्तीनियों के बीच 'आतंक के चक्र' को तोड़ना चाहते हैं।
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने इस पर 'गहरी चिंता' व्यक्त करते हुए कहा कि इस विधेयक से 'लोकतांत्रिक सिद्धांतों के संबंध में इजरायल की प्रतिबद्धताओं के कमजोर होने' का खतरा है।
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