पटना , अगस्त 21 -- िहार अब अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध जैव विविधता के लिए भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। राज्य की हरी-भरी वन संपदा, वन्यजीव, पहाड़, झरने, गर्म जलस्रोत, जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। इसी संभावनाओं को नई पहचान देने के लिए बिहार सरकार इको टूरिज्म को पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आगे बढ़ा रही है।

सरकार का जोर ऐसे पर्यटन मॉडल पर है, जिसमें प्रकृति का आनंद भी मिले और उसका संरक्षण भी सुनिश्चित हो। इको टूरिज्म के विकास के साथ स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

राजगीर नेचर सफारी बिहार में इको टूरिज्म के बदलते स्वरूप का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरी है। पहाड़ियों और प्राकृतिक परिवेश के बीच विकसित यह स्थल पर्यटकों को प्रकृति के करीब आने के साथ रोमांच का अनुभव भी कराता है।

यहां प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ साहसिक गतिविधियों ने पर्यटकों के अनुभव को और व्यापक बनाया है। इससे राजगीर के पारंपरिक धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को एक नया आयाम मिला है। अब पर्यटक राजगीर में विरासत देखने के साथ जंगल, पहाड़ और रोमांच का भी आनंद ले रहे हैं।

इससे आसपास के क्षेत्रों में होटल, परिवहन, खान-पान, स्थानीय उत्पाद, गाइड और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल है। घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और विभिन्न वन्यजीव प्रजातियां इसे प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटकों के लिए खास बनाती हैं।

यहां पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। इको टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर आय के वैकल्पिक साधन विकसित करने पर भी जोर है।

मुंगेर का भीमबांध अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, साल के जंगल, जैव विविधता और गर्म जलस्रोतों के कारण अलग पहचान रखता है। जंगल के बीच गर्म जलस्रोत और शांत प्राकृतिक वातावरण इसे प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए विशेष बनाते हैं।क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन सुविधाओं के विकास से भीमबांध को बिहार के प्रमुख इको टूरिज्म स्थलों में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

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