जौनपुर , अप्रैल 28 -- उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक महिला ने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने सगे भाई को मुखाग्नि देकर साहस, कर्तव्य और रिश्तों की मिसाल पेश की है। इससे पहले वह अपने इकलौते पुत्र का अंतिम संस्कार भी स्वयं कर चुकी हैं। नगर के रासमंडल मच्छरहट्टा निवासी अंजू पाठक ने अपने भाई संजय कांत तिवारी के निधन पर स्वयं उन्हें मुखाग्नि दी। इससे लगभग तीन वर्ष पूर्व उन्होंने अपने इकलौते पुत्र के निधन के बाद नगर के रामघाट पर स्वयं उसका अंतिम संस्कार कर समाज में अलग उदाहरण प्रस्तुत किया था। बताया गया कि संजय कांत तिवारी (56) का आकस्मिक निधन हो गया। वह काशी विद्यापीठ, वाराणसी से शिक्षित थे और अविवाहित थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन परिवार के लिए समर्पित कर दिया था।
वर्ष 2013 में अंजू पाठक के पति रज्जन पाठक के निधन के बाद संजय कांत तिवारी ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और निष्ठा के साथ उसका निर्वहन किया। उन्होंने अपने भांजे के साथ मिलकर पारिवारिक व्यवसाय को न केवल संभाला, बल्कि उसे आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भाई के निधन के बाद जब परिवार में कोई अन्य पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था, तब अंजू पाठक ने एक बार फिर साहस दिखाते हुए सभी धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। रामघाट पर उन्होंने स्वयं अपने भाई को मुखाग्नि दी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंजू पाठक ने जिस दृढ़ता और हिम्मत के साथ दोनों बार अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने यह साबित कर दिया कि रिश्तों की सच्चाई और कर्तव्य किसी लिंग के मोहताज नहीं होते। अंजू पाठक का यह कदम महिलाओं की बदलती भूमिका और उनके सशक्तिकरण का भी प्रतीक बन गया।
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