चंडीगढ़ , जुलाई 18 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने टांडा के पूर्व थाना प्रभारी इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा मामले को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि नागरा को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और यह पता लगाया जाना चाहिए कि उसे संरक्षण देने वाले लोग कौन थे।
शिअद के मुख्य प्रवक्ता अरशदीप सिंह कलेर ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि अमेरिका की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा गैंगस्टरों से कथित संबंधों के मामले में नामित किए गए इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत नागरा का आम आदमी पार्टी से करीबी संबंध था। श्री कलेर ने आरोप लगाया कि नागरा ने पहले आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न 'झाड़ू' के कथित अपमान को लेकर भी धार्मिक भावनाएं भड़काने (बेअदबी) का मामला दर्ज किया था। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बदले में नागरा को खुली छूट दी गई, जिसका फायदा उठाकर उसने अमेरिका में रहने वाले एक पंजाबी परिवार से कथित तौर पर धन उगाही की। यदि नागरा उगाही का नेटवर्क चला रहा था तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि उसे राजनीतिक संरक्षण किसने दिया और क्या कथित अवैध कमाई का हिस्सा उसके राजनीतिक आकाओं तक भी पहुंचता था।
शिअद प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी संघीय एजेंसी एफबीआई के अभियोग में सामने आए आरोप पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार की कार्यशैली को उजागर करते हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि एक पुलिस अधिकारी कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के साथ कथित रूप से मिलकर काम कर रहा था तो यह बेहद गंभीर मामला है।
श्री कलेर ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने जग्गू भगवानपुरिया को असम की जेल से पंजाब लाने में सुविधा दी और तरनतारन उपचुनाव में राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने के लिए उसका इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने यूएपीए से जुड़े एक मामले में उसके खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं दी।
शिअद नेता ने कहा कि पूरा घटनाक्रम पुलिस अधिकारियों, अपराधियों और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच कथित गठजोड़ की ओर संकेत करता है, जिसकी सच्चाई केवल स्वतंत्र जांच से ही सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास गृह विभाग भी है और वे पुलिस व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को रोकने में विफल रहे हैं, इसलिए उन्हें जनहित में तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
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