जगदलपुर , जुलाई 24 -- छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना के वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अंतरराज्यीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीमा से लगे वन क्षेत्रों में संयुक्त निगरानी, शिकार पर रोक और समन्वित कार्रवाई के लिए टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, तीनों राज्यों की सीमाओं से लगे इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में संयुक्त गश्त की जाएगी। बाहरी राज्यों से आने वाले शिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए संयुक्त टीम को भी सक्रिय रखा जाएगा।

बैठक में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र और तेलंगाना की ओर से पर्यटकों के लिए प्रवेश की सुविधा उपलब्ध है, जबकि छत्तीसगढ़ की ओर से पर्यटकों के प्रवेश की तैयारी अंतिम चरण में है। प्रस्तावित योजना के अनुसार नवंबर-दिसंबर से बीजापुर जिले के फरसेगढ़ मार्ग से पर्यटकों के लिए प्रवेश शुरू किया जा सकता है।

मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ), बस्तर ने बैठक के दौरान कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए वन्यजीव संरक्षण, संयुक्त गश्त और पर्यटन को बढ़ावा देने के संबंध में तीनों राज्यों के अधिकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

उल्लेखनीय है कि लगभग 2,799 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण बाघ आवासों में शामिल है। पूर्व में यह क्षेत्र नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है, लेकिन सुरक्षा हालात में सुधार के बाद अब वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ नियंत्रित इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

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