भोपाल , दिसंबर 31 -- मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले संक्रमण ने गंभीर रूप ले लिया है। इस घटना में छह महीने के एक बच्चे सहित अब तक कुल नौ लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है, जबकि सैकड़ों लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। हालांकि जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने देर रात केवल चार मौतों की ही आधिकारिक पुष्टि की है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि 25 से 30 दिसंबर के बीच नौ लोगों की जान जा चुकी है।
दूषित पानी पीने से भागीरथपुरा क्षेत्र में हालात बेकाबू हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 1146 मरीजों का उपचार किया जा चुका है, जबकि 150 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। स्थिति यह है कि क्षेत्र के लगभग हर दूसरे घर से कोई न कोई व्यक्ति बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहा है।
लापरवाही सामने आने के बाद प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। निगम के जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि प्रभारी उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव को सेवा से बर्खास्त किया गया है। मामले की जांच के लिए एडीएम नवजीवन पंवार की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा है कि जनसामान्य का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने तथा सभी मरीजों का मुफ्त इलाज कराने की घोषणा की है।
उधर, निगम की टीम ने मंगलवार को क्षेत्र में दूषित पानी के स्रोत की जांच की। पानी की टंकी के पास बने एक शौचालय को तोड़ा गया और एक चैंबर को भी नष्ट किया गया। टीम ने 73 घरों से पानी के सैंपल लिए तथा घर-घर दवाइयों का वितरण किया।
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हजारों लोग बीमार हुए हैं और आठ लोगों की मौत हो चुकी है। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की विफलता का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि साल के अंतिम दिन भाजपा सरकार ने नए वर्ष की खुशियों को शोक और मातम में बदल दिया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित