धार , मई 5 -- मध्यप्रदेश में इंदौर-दाहोद रेल परियोजना इन दिनों निर्माण कार्य से अधिक भुगतान विवाद को लेकर चर्चा में है। धार से अमझेरा तक लगभग 25 किलोमीटर के रेल सेक्शन का कार्य तय समयसीमा के बाद भी 10 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सका है।

सूत्रों के अनुसार इस परियोजना का ठेका जीकेसी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को दिया गया था, जिसने कार्य को आगे पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर सौंप दिया। प्रारंभ में सनवर्स रेल टेक बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से स्थानीय स्तर पर मशीनें, मजदूर और संसाधन लगाकर काम शुरू किया गया, लेकिन समय के साथ भुगतान में देरी होने लगी, जिससे छोटे वेंडरों का बकाया बढ़ता गया।

वेंडरों का कहना है कि बकाया भुगतान नहीं मिलने तक प्लांट से मशीनें और सामग्री बाहर नहीं जाने दी जाएंगी। उनका दावा है कि प्लांट में अभी भी 2 से 2.5 करोड़ रुपये का माल मौजूद है, जिससे उन्हें भुगतान मिलने की उम्मीद है।

आरोप है कि भुगतान का दबाव बढ़ने पर कंपनी ने एजेंसी बदलकर कार्य कोंडर कंपनी को सौंप दिया, लेकिन पुराने वेंडरों का भुगतान अब तक नहीं किया गया। इस कारण विवाद खुलकर सामने आ गया है और निर्माण कार्य लगभग ठप हो गया है।

भजनलाल इंटरप्राइजेज के ओम प्रकाश बिश्नोई ने बताया कि वे पिछले 18 महीनों से कार्य कर रहे थे, लेकिन पिछले 6 महीनों से भुगतान बंद है। उनका अकेले 80 से 85 लाख रुपये बकाया है, जबकि कुल बकाया राशि 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। उन्होंने भुगतान मांगने पर टालमटोल और धमकी दिए जाने के भी आरोप लगाए।

वहीं कोंडर कंपनी के पार्टनर भागचंद का कहना है कि पुराने भुगतान से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि परियोजना भूमि अधिग्रहण और तकनीकी कारणों से पहले ही विलंबित रही है, जिसके चलते सरकार से एक वर्ष का समय विस्तार मांगा गया है और कार्य शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

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