जकार्ता , अगस्त 28 -- इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में संसद के सामने चल रहा आंदोलन शुक्रवार को दूसरे दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलनकारी संपत्ति जब्ती विधेयक को शीघ्र पारित करने और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त सजा की मांग को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टो में यह जानकारी दी गयी है।.जकार्ता पोस्ट ने बताया कि अज्ञात उपद्रवियों ने संसद परिसर में जबरन घुसने का प्रयास किया और कचरे में आग लगा दी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने तेज पानी की बौछारें और आंसू गैस का इस्तेमाल किया लेकिन इसके बाद भी हिंसा पेजोम्पोंगन और स्लिपी इलाकों में फैल गई।

इस आंदोलन की मुख्य ऊर्जा, सोशल मीडिया पर लामबंदी और सड़कों पर अग्रिम भूमिका युवाओं, विश्वविद्यालय के छात्रों और 'जेन जी' की रही है हालांकि इनके अलावा समाज के दूसरे वर्ग के लोग भी इस आंदोलन में शामिल हुए।

आज सुबह प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ, जिसमें मध्य जावा के पति क्षेत्र के निवासियों और 'यूनाइटेड पति पीपुल्स एलायंस' के कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों छात्र शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग वर्षों से अटके 'एसेट फॉरफीचर बिल' को तुरंत पास करने की है, ताकि भ्रष्ट अधिकारियों की अवैध संपत्ति को सरकार जब्त कर सके। इसके अलावा युवाओं ने बढ़ती महंगाई, घटते अवसरों और निष्फल सरकारी नीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए एकजुट हुए छात्रों और युवाओं ने संसद परिसर के बाहर जोरदार नारेबाजी की।

इससे पहले गुरुवार शाम को सांसदों के इस साल दिसंबर तक विधेयक पारित करने का आश्वासन दिए जाने के बाद एलायंस से जुड़े नागरिक समूह तो वहां से हट गए, लेकिन शाम होते-होते युवा छात्रों और अन्य समूहों का विरोध उग्र हो गया। रात भर चली हिंसा के दौरान स्लिपी पुलिस सबसेक्टर चौकी और पास में खड़ी दो मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बांस, लाठियां और पत्थर लेकर पहुंचे उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे पुलिसकर्मियों को पीछे हटना पड़ा।

आज सुबह तक जारी इस उपद्रव के कारण पाल्मेरा-तनाह अबांग पटरियों के आसपास सुरक्षा स्थिति को देखते हुए कम्यूटर लाइन रेल सेवाओं का संचालन रोकना पड़ा, जिससे सार्वजनिक आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। शुक्रवार को काफी मशक्कत के बाद मुख्य सड़कों से अवरोध हटाकर यातायात बहाल किया जा सका।

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