नयी दिल्ली , फरवरी 18 -- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में 'एआई इम्पैक्ट स्टार्टअप बुक' जारी की है। सरकार ने इसे देश भर में विकसित किये जा रहे कृत्रिम बुद्धिमता समाधानों के एक समेकित रिकॉर्ड के रूप में पेश किया है।

यह संग्रह बड़ी संख्या में स्टार्टअपों से प्राप्त जानकारी के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों और तकनीकों के रुझानों को दर्शाता है। अध्ययन के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा अब भी एक प्रमुख फोकस क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही फाउंडेशन मॉडल, डेटाबेस, कचरा प्रबंधन तकनीक और भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष रूप से तैयार 'वॉयस और विजन-आधारित' अनुप्रयोगों में भी काम का विस्तार हो रहा है।

यह रिपोर्ट बड़े महानगरों के बाहर उभरते स्टार्टअपों की बढ़ती संख्या का भी उल्लेख करती है। साथ ही, इसमें एआई समाधानों को लागू करने के लिए सरकारी भागीदारी को महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में दर्शाया गया है।

इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अतिरिक्त सचिव और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि यह प्रकाशन भारत में विकसित एआई समाधानों का अपनी तरह का 'पहला समेकित संग्रह' पेश करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डाटा केंद्र, डाटासेट और फाउंडेशन मॉडल जैसे बुनियादी ढांचे का निर्माण महत्वपूर्ण है, लेकिन एआई की असली परीक्षा स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और रोजगार जैसी सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच को बेहतर बनाने में है।

श्री सिंह ने तर्क दिया कि भारत के लिए अगली चुनौती केवल प्रयोग करना नहीं, बल्कि पैमाना है। उन्होंने कहा कि देश को स्टार्टअपों को सरकारी एजेंसियों से व्यवस्थित रूप से जोड़कर पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़ना होगा और इन्हें जनसंख्या के स्तर पर लागू करना होगा। उन्होंने उल्लेख किया कि इस पुस्तक में सूचीबद्ध 100 समाधानों में से यदि अगले 12 से 18 महीनों में 10 को भी बड़े स्तर पर लागू कर दिया जाता है, तो यह एक सार्थक प्रगति होगी। उन्होंने आगे कहा कि यदि भारत खुद को 'यूज-केस कैपिटल' के रूप में स्थापित करना चाहता है, तो यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित