भुवनेश्वर , जून 26 -- इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) की पुरी शाखा ने शुक्रवार को एक 'हेरिटेज ओरिएंटेशन' कार्यक्रम का आयोजन किया जिसका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्यों को 'विरासत राजदूत' के रूप में तैयार करना और ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिये जमीनी स्तर पर लोगों की भागीदारी को और मजबूत बनाना है।
पुरी के यूथ हॉस्टल में आयोजित इस दिनभर के कार्यक्रम में करीब 40 सदस्यों ने हिस्सा लिया, जहां इतिहासकारों, संरक्षणवादियों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने राज्य की मूर्त और अमूर्त विरासत पर अपनी प्रस्तुतियां दीं।
इंटेक की कटक शाखा के संयोजक दीपक सामंतराय ने ओडिशा की विरासत संरक्षण प्रणाली की रूपरेखा सामने रखी, जबकि विद्वान कपिलेश्वर मिश्रा ने राज्य की अमूर्त सांस्कृतिक परंपराओं पर अपनी बात रखी। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स धारक और 'पेपरमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर शशांक दाश ने ताड़ के पत्तों की पांडुलिपियों और हाथ से बने कागज की परंपराओं को सुरक्षित रखने पर चर्चा की।
राज्य संस्कृति विभाग के पूर्व अधिकारी प्रफुल्ल सामंतराय ने विरासत की रक्षा के लिए सरकारी नीतियों के समर्थन और आम जनता की भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया। इतिहासकार गोलक बिहारी सिंह ने पुरी की विरासत, खासकर वहां के कम मशहूर स्मारकों के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इंटेक की पुरी शाखा के संयोजक सुभाष रथ ने कहा कि इस आयोजन का मकसद सदस्यों को 'विरासत राजदूत' में बदलना है, जो जमीनी स्तर पर जिले की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे। हर सत्र के बाद आपस में विचार-विमर्श हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने-अपने इलाकों में मौखिक इतिहास और खत्म हो रही पारंपरिक शिल्पकलाओं का दस्तावेजीकरण करने का संकल्प लिया।
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