भोपाल , सितंबर 09 -- मध्यप्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर तीन दिन से आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों की मांग सरकार ने मान ली है। उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बुधवार को बताया कि इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50 प्रतिशत बढ़ाकर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। सरकार के निर्णय के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन समाप्त कर काम पर लौटने की घोषणा की।
श्री शुक्ल ने बताया कि इंटर्न डॉक्टरों, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सहमति से स्टाइपेंड बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार डॉक्टरों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर विचार कर रही है।
उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में प्रारंभिक रूप से सामने आए दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। घायल छात्रों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्टाइपेंड बढ़ाने के निर्णय के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने भोपाल के कमला पार्क क्षेत्र में चल रहा प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सड़क खाली कर दी। इसके बाद यातायात सामान्य कर दिया गया। आंदोलन के दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी और वैकल्पिक ऑपरेशन का बहिष्कार किया था, जबकि आपातकालीन और आईसीयू सेवाएं जारी रखी गई थीं।
हमीदिया अस्पताल में आंदोलन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा। बुधवार को ओपीडी सीमित समय के लिए संचालित हुई। दोपहर तक करीब 500 मरीजों के पहुंचने की जानकारी सामने आई, जबकि सामान्य दिनों में यहां करीब तीन हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। सामान्य दिनों में होने वाले करीब 40 वैकल्पिक ऑपरेशनों की तुलना में बुधवार को ये ऑपरेशन नहीं हुए, जबकि दो आपातकालीन ऑपरेशन किए गए।
इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन के समर्थन में जूनियर डॉक्टर और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह सिद्धू ने आंदोलन के दौरान वन नेशन, वन स्टाइपेंड, बल प्रयोग के मामले में कार्रवाई, घायल डॉक्टरों को उचित मुआवजा और प्रदर्शन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग रखी थी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को छात्रों पर वाटर कैनन के इस्तेमाल की जानकारी मिलने पर नाराजगी हुई थी। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी। सरकार ने छात्रों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए समाधान किया है।
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