अमृतसर , अप्रैल 01 -- मध्य पूर्व में जारी संकट और वैश्विक स्तर पर बिगड़ते पर्यावरणीय हालात के बीच बुधवार को यहां आयोजित इंटरफेथ सेमिनार में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने शांति, सौहार्द और जलवायु न्याय (क्लाइमेट जस्टिस) के लिए एकजुट होकर आवाज उठाई।
यह सेमिनार 'क्लाइमेट जस्टिस' विषय पर आयोजित किया गया, जिसे क्रिश्चियन इंस्टीट्यूट फॉर रिलिजियस स्टडीज और बैरिंग इंस्टीट्यूट ऑफ थियोलॉजी, बटाला ने संयुक्त रूप से आयोजित किया। यह कार्यक्रम चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) के बिशप, द राइट रेवरेंड मनोज चरन के तत्वावधान के आधीन आयोजन किया गया था।
मुख्य वक्तव्य देते हुए बिशप मनोज चरण ने जलवायु न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील होने और सृष्टि के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया, साथ ही वाईवल से प्रेरणा लेने की बात कही।
इस मौके पर इस्लामी विद्वान और अहमदिया मुस्लिम समुदाय के प्रवक्ता डॉ. तारिक अहमद ने इस्लाम के दृष्टिकोण से जलवायु न्याय पर विचार रखे। उन्होंने कुरान और पैगंबर उन्होंने पवित्र कुरान और पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में सिख धर्म की ओर से एडवोकेट सुखवीर पनवान ने विचार साझा किए, जबकि बैरिंग यूनियन क्रिश्चियन कॉलेज के प्रो. नीरज शर्मा ने हिंदू दर्शन के माध्यम से पर्यावरणीय जिम्मेदारी की अवधारणा को स्पष्ट किया।
सीआईआरएस के कार्यवाहक निदेशक और बैरिंग इंस्टीट्यूट ऑफ थियोलॉजी के प्रिंसिपल रेव. डॉ. पुलक सामंतराय ने इंटरफेथ समुदाय को प्रेरित करते हुए जलवायु न्याय को बढ़ावा देने में धार्मिक समुदायों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
सेमिनार में कई गणमान्य अतिथि भी शामिल हुए, जिनमें डॉ. डेरिक एंगल्स, रेव. सोहन लाल, रेव. मुश्ताक ए. मल्क, रेव. मार्कस, डॉ. अशानी कांसरा, श्री नरेंद्र सिंह, श्रीमती सोनिका और श्री अभिषेक मिचेल शामिल थे।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण की रक्षा करने, सृष्टि के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और समाज में शांति व सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया। साथ ही, सरकार से अपील की गई कि नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में पर्यावरणीय संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जाए।
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