ग्रेटर नोएडा , जनवरी 27 -- उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर जिला के ग्रेटर नोएडा स्थित नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के सेक्टर-150 के पास हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत मामले में गिरफ्तार आरोपियों की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी तक बढ़ गयी है।

इस मामले की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने लोटस ग्रीन बिल्डर से जुड़े आरोपी रवि बंसल और सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी तक बढ़ा दी, जबकि एमजेड विजटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार की न्यायिक हिरासत दो फरवरी तक बढ़ा दी।

सुनवाई के दौरान विवेचना में लापरवाही सामने आने पर अदालत ने विवेचक को कड़ी फटकार लगाई और अगली तारीख पर पूरी तैयारी के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए।

इस दौरान लोटस ग्रीन की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने दलील दी कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी न तो कंपनी के निदेशक हैं और न ही निर्णय लेने की स्थिति में हैं। वे केवल वेतनभोगी कर्मचारी हैं, जिन्हें प्रशासनिक और पुलिस दबाव में आनन-फानन में गिरफ्तार किया गया। अधिवक्ताओं ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश का पालन न होने का भी आरोप लगाया।

अदालत को बताया गया कि कंपनी की ओर से करीब 500 पेज की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की गई है, जिसमें तकनीकी दस्तावेज, जीपीएस युक्त सैटेलाइट इमेज और पुराने रिकॉर्ड शामिल हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि वर्ष 2021 से संबंधित नाले में जलभराव की स्थिति बनी हुई थी, जिसकी सूचना नोएडा प्राधिकरण को पहले ही दी जा चुकी थी और मरम्मत के लिए राशि भी स्वीकृत हुई थी, लेकिन कार्य नहीं कराया गया। ऐसे में जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर डालना न्यायोचित नहीं है।

आरोपियों की हिरासत पर बहस के दौरान जब अदालत ने विवेचक से 500 पन्नों की रिपोर्ट के अध्ययन के बारे में पूछा तो उन्होंने समय की कमी का हवाला दिया। इस पर बचाव पक्ष ने कड़ा विरोध जताते हुए सवाल किया कि बिना पूरी जांच के गिरफ्तारी किस आधार पर की गई।

विवेचक के जवाब से असंतुष्ट सीजेएम ने कहा कि पिछली सुनवाई में भी पूरी तैयारी के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद रिपोर्ट का अध्ययन नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के गंभीर मामले में जांच एजेंसी से पूरी जिम्मेदारी और तत्परता अपेक्षित है।

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