चंडीगढ़ , अगस्त 11 -- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बिजली क्षेत्र के इंजीनियरों एवं कर्मचारियों के निलंबन आदेश तत्काल रद्द करने, रोके गये वेतन जारी करने तथा कथित उत्पीड़न की सभी कार्रवाई वापस लेने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है।

एआईपीईएफ के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने मंगलवार को उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि पूरे रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच किये बिना इंजीनियरों और कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए निलंबन अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई करना पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य है।

पत्र में जम्मू-कश्मीर पावर एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी के हवाले से कहा गया है कि संबंधित क्षेत्रीय इंजीनियरों और अधिकारियों ने बिजली चोरी तथा बिजली के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ पहले ही कई कार्रवाई की थी। इनमें बिजली कनेक्शन काटना, जुर्माना निर्धारित करना, वसूली की कार्रवाई, एफआईआर दर्ज करने के अनुरोध, पुलिस अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण और बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। एआईपीईएफ ने कहा कि प्रशासन द्वारा पूरे तथ्यात्मक और तकनीकी रिकॉर्ड की जांच कर स्थापित प्रक्रिया के अनुसार जिम्मेदारी तय करने के बजाय इंजीनियरों और कर्मचारियों को कथित तौर पर बलि का बकरा बनाया गया और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई। संगठन ने कहा कि संबंधित मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता द्वारा पहले ही कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत किये जाने के तथ्य की भी तत्काल और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

फेडरेशन ने सोलर घर योजना में अपेक्षाकृत कम प्रगति के आधार पर विभिन्न डिवीजनों और सब-डिवीजनों में इंजीनियरों एवं अधिकारियों का वेतन रोके जाने पर भी कड़ी आपत्ति जतायी। उसने कहा कि वेतन कर्मचारियों की वैध आजीविका है और उचित प्रक्रिया का पालन किये बिना इसे दबाव बनाने या दंड देने के उपाय के रूप में नहीं रोका जा सकता।

श्री दुबे ने कहा कि मनमाने ढंग से निलंबन, वेतन रोकने और व्यवस्था की कमियों की जिम्मेदारी दूसरों पर डालने के लिए कर्मचारियों को निशाना बनाने से कार्यबल का मनोबल गिरता है तथा विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और बिजली क्षेत्र के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी केवल पूरी तकनीकी और प्रशासनिक जांच के बाद ही तय की जानी चाहिए। एआईपीईएफ ने चेतावनी दी कि यदि जम्मू-कश्मीर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एसोसिएशन (जेकेईईजीए) और अन्य बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर अपने जायज अधिकारों के समर्थन में आंदोलन करने के लिए मजबूर होते हैं तो देशभर के बिजली इंजीनियर और कर्मचारी उनके समर्थन में पूरी एकजुटता के साथ खड़े होंगे।

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