हैदराबाद , सितंबर 18 -- तेलंगाना राज्य मानवाधिकार आयोग (टीजीएचआरसी) ने मेडक जिले के शिवमपेट मंडल स्थित रुपला थंडा गांव में आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में मारे गये तीन वर्षीय मासूम बच्चे निथुन पवार के माता-पिता को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की सिफारिश की है।
यह घटना 18 जुलाई 2025 को हुई थी। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति डॉ. शमीम अख्तर कर रहे हैं।
आयोग ने मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया था। जांच के दौरान आयोग ने बच्चे के माता-पिता के बयान दर्ज किये और एरिया अस्पताल, नरसपुर के मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की। मेडिकल रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि मासूम को शाम 6:10 बजे मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था और उसके शरीर पर कुत्तों के काटने के कई गंभीर निशान थे।
मानवाधिकार आयोग ने आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए जिम्मेदार संबंधित स्थानीय निकाय और अधिकारियों की ओर से भारी लापरवाही पाये जाने की बात कही। इसके साथ ही आयोग ने इस समस्या पर लगाम कसने के लिए प्रभावी और निरंतर कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।
उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्देशों और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन की रक्षा करने के राज्य के दायित्व का हवाला देते हुए आयोग ने माना कि सार्वजनिक कानून के तहत पीड़ित माता-पिता मुआवजे के हकदार हैं।
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 के तहत कार्रवाई करते हुए आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे पीड़ित माता-पिता जरपुला होब्या और जरपुला लावण्या को तीन महीने के भीतर पांच लाख रुपये का भुगतान सुनिश्चित करें।
मेडक के जिलाधिकारी को इस मामले की पैरवी करने और मुआवजा राशि का वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
संबंधित अधिकारियों को आयोग के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया, जिसके बाद इस शिकायत का निपटारा कर दिया गया।
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