बिलासपुर , जुलाई 24 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश में आवारा कुत्तों के हमलों, रेबीज के बढ़ते खतरे तथा राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर विचरण करने वाले आवारा मवेशियों के प्रभावी प्रबंधन के मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को निगरानी व्यवस्था और सुदृढ़ करने के शुक्रवार को निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व में जारी निर्देशों के अनुपालन में मुख्य सचिव की ओर से शपथपत्र प्रस्तुत किया गया। शपथपत्र में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा एनिमल वेलफेयर बोर्ड आफ इंडिया की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा दिया गया।
मुख्य सचिव ने अपने हलफनामे में प्रदेश में आवारा कुत्तों और आवारा मवेशियों के प्रबंधन के लिए उठाए जा रहे विभिन्न कदमों की विस्तार से जानकारी न्यायालय के समक्ष रखी।
प्रस्तुत जानकारी पर संतोष व्यक्त करते हुए खंडपीठ ने कहा, "यह विषय सीधे तौर पर आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए केवल योजनाएं बनाना काफी नहीं है, बल्कि सभी जिलों में इसकी निरंतर निगरानी जरूरी है।"न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि इस संबंध में आगे हुई प्रगति का विवरण नए शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई है।
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