चेन्नई , अक्टूबर 26 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और दो मंत्रियों को समन जारी करने की द्रमुक की याचिका पर सुनवाई 12 नवंबर, 2026 तक के लिए टाल दी है।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की याचिका में विशेष जांच दल (एसआईटी) को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और दो मंत्रियों श्री आधव अर्जुन और श्री सीटीआर निर्मल कुमार को बुलाकर उनसे पूछताछ करे। इन लोगों ने द्रमुक पर आरोप लगाया था कि पार्टी ने 'जेम ग्रेनाइट्स' के विवादित व्यवसायी आर. वीरमणी के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम मामले को दबाने की कोशिश की। याचिका में यह भी मांग की गई कि इस मामले से जुड़े जो भी सबूत इन लोगों के पास हैं, उन्हें इकट्ठा किया जाए।
जब द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) कोषाध्यक्ष टीआर बालू की ओर से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन के समक्ष सुनवाई हुई, तो याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने एक वरिष्ठ अधिवक्ता को बहस के लिए बुलाने हेतु एक सप्ताह का समय मांगा। इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति ने मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर तक के लिए टाल दी।
द्रमुक सांसद टीआर बालू ने 30 सितंबर को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इससे एक दिन पहले उन्होंने विशेष जांच दल (एसआईटी) के पास इसी तरह की मांग वाली एक शिकायत दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि अगर मुख्यमंत्री या मंत्रियों के पास ऐसा कोई सबूत है जिससे यह पता चले कि मामले को दबाने की कोशिश की गई थी, तो उसे एसआईटी को सौंप दिया जाना चाहिए।
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