भोपाल , फरवरी 17 -- मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह दस्तावेज संतुलित और समावेशी विकास का नहीं, बल्कि डेटा आधारित प्रचार का उदाहरण है। सरकार चमकदार प्रतिशत और बड़े आंकड़ों के सहारे जमीनी सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है, जबकि प्रदेश की वास्तविक अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है।
श्री पटवारी ने कहा कि मोहन सरकार जीडीपी में 11.14 प्रतिशत वृद्धि कर 16.69 लाख करोड़ रुपये होने का दावा कर रही है, लेकिन यदि अर्थव्यवस्था इतनी तेज़ी से बढ़ रही है तो बेरोज़गारी दर लगातार राष्ट्रीय औसत के आसपास या उससे ऊपर क्यों बनी हुई है। लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में विलंब, भर्ती घोटालों और अनिश्चित भविष्य के बीच भटकने को मजबूर क्यों हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रति व्यक्ति आय 1.69 लाख रुपये होने की बात कर रही है, पर सवाल यह है कि क्या महंगाई घटाने के बाद ग्रामीण परिवारों की वास्तविक आय बढ़ी है। क्या मजदूरी दर उसी अनुपात में बढ़ी है, जैसा कागजों में दिखाया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र पर सरकार के दावों को खोखला बताते हुए श्री पटवारी ने कहा कि 7.66 प्रतिशत कृषि वृद्धि और 14.68 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन बढ़ने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन किसान आत्महत्या के मामले क्यों सामने आ रहे हैं। डीजल, खाद, बीज और बिजली की लागत पिछले वर्षों में तेज़ी से क्यों बढ़ी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पूरी खरीदी क्यों नहीं हो पा रही है।
उन्होंने राज्य पर बढ़ते कर्ज को सबसे चिंताजनक बताया। उनका कहना था कि ऋण-जीएसडीपी अनुपात 31.3 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, यानी मध्य प्रदेश पहले से भारी कर्ज में डूबा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए भी नया कर्ज लेना पड़ रहा है, जो आर्थिक प्रबंधन की विफलता का संकेत है।
औद्योगिक निवेश को लेकर उन्होंने कहा कि 1.17 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 1.7 लाख रोजगार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन प्रदेश में स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर नजर नहीं आ रहे हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा के मोर्चे पर भी सरकार को घेरते हुए श्री पटवारी ने कहा कि मातृ मृत्यु दर 142 पर बनी हुई है और स्कूल ड्रॉपआउट दर 6.3 प्रतिशत है। क्या यही आदर्श विकास मॉडल है।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल करते हुए कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रदेश की आर्थिक अराजकता का प्रामाणिक दस्तावेज बन चुका है। मध्य प्रदेश को इवेंट मैनेजमेंट और प्रचार नहीं, बल्कि रोजगार, किसान सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की सख्त जरूरत है। आंकड़ों की आयातित चमक से सच्चाई अधिक दिन तक छिपाई नहीं जा सकती।
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