बैतूल , अगस्त 06 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई नगर पालिका वित्तीय संकट से जूझ रही है। आर्थिक तंगी के कारण कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। दो माह से वेतन नहीं मिलने से सफाई कर्मचारियों सहित अन्य कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों ने बुधवार को विधायक चंद्रशेखर देशमुख से मुलाकात कर शीघ्र वेतन भुगतान की मांग की।

कर्मचारियों ने बताया कि जून और जुलाई माह का वेतन नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उनका कहना है कि उधार मिलना बंद हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा है।

शिकायत मिलने पर विधायक श्री देशमुख नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ बैठक कर वित्तीय स्थिति की समीक्षा की। बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष नीतू प्रह्लाद परमार, सभापति महेंद्र जैन, पार्षद अजय यादव, सुरेश पौनिकर, रितेश विश्वकर्मा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) वीरेंद्र तिवारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान विधायक ने नियमित वेतन भुगतान नहीं होने पर नाराजगी जताई और सीएमओ से नगर पालिका की आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा मांगा। लेखापाल जी.आर. देशमुख से भी वित्तीय अभिलेखों की जानकारी ली गई। रिकॉर्ड की समीक्षा में नगर पालिका की आर्थिक स्थिति कमजोर पाई गई। विधायक ने अधिकारियों को राजस्व के नए स्रोत विकसित करने तथा कर्मचारियों को प्रत्येक माह समय पर वेतन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने बताया कि नगर पालिका के आय स्रोत लंबे समय से सीमित बने हुए हैं। वर्तमान में जलकर की लगभग 48 लाख रुपये, संपत्ति कर की 96 लाख रुपये तथा दुकान किराए की करीब 13 लाख रुपये की बकाया राशि है। उनका कहना था कि मौजूदा आय से नियमित खर्चों का वहन करना कठिन हो रहा है, इसलिए राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास आवश्यक हैं।

सीएमओ वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि जून माह के वेतन का भुगतान कर दिया गया है, जबकि जुलाई माह का वेतन भी शीघ्र जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर वसूली में तेजी लाने और नगर पालिका की आय बढ़ाने के लिए योजना बनाकर कार्य किया जा रहा है, ताकि भविष्य में वेतन भुगतान में विलंब न हो।

बैठक में नगर पालिका की मासिक आय और व्यय का विवरण भी प्रस्तुत किया गया। लेखापाल जी.आर. देशमुख के अनुसार नगर पालिका को प्रतिमाह लगभग 50 लाख रुपये की आय होती है, जिसमें करीब 42 लाख रुपये चुंगी कर तथा सात से आठ लाख रुपये जलकर, संपत्ति कर और दुकान किराए से प्राप्त होते हैं। इसके विपरीत मासिक व्यय लगभग 93 लाख रुपये है। इसमें वेतन एवं भत्तों पर करीब 75 लाख रुपये, बिजली बिल पर 20 लाख रुपये से अधिक तथा डीजल पर लगभग सात लाख रुपये खर्च होते हैं।

कर्मचारियों ने यह भी शिकायत की कि सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य निधि (जीपीएफ) और अवकाश नकदीकरण की राशि का भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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