दावोस , जनवरी 22 -- उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के महासचिव मार्क रुटे ने कहा है कि आर्कटिक में नाटो की कार्रवाइयों से यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता में कोई कमी नहीं आएगी।

श्री रुटे ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ग्रीनलैंड में खनिजों को पता लगाने के संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो महासचिव से मुलाकात के बाद घोषणा की कि वह ग्रीनलैंड को लेकर एक 'भविष्य के समझौते के ढांचे' तक पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा, "नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ हुई एक उत्पादक बैठक में हमने ग्रीनलैंड और वास्तव में पूरे आर्कटिक क्षेत्र के संबंध में भविष्य के समझौते के लिए एक ढांचा तैयार किया है।"हालांकि इस ढांचे का विवरण अभी अज्ञात है, लेकिन श्री ट्रंप ने उन आयात शुल्कों को हटाने पर सहमति व्यक्त की है, जिन्हें उन्होंने एक फरवरी से यूरोपीय सहयोगियों पर लगाने की धमकी दी थी।

श्री ट्रंप ने डेनमार्क की आलोचना करते हुए उसपर ग्रीनलैंड की रक्षा करने को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "हमें रणनीतिक राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसकी आवश्यकता है। यह विशाल, असुरक्षित द्वीप वास्तव में उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है। वह हमारा क्षेत्र है।"अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "यह समाधान यदि पूरा होता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका और सभी नाटो देशों के लिए बेहतर होगा। इस समझ के आधार पर मैं आयात शुल्कों को लागू नहीं करूँगा।" उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड से संबंधित 'गोल्डन डोम' के बारे में अतिरिक्त चर्चा की जा रही है। चर्चा आगे बढ़ने पर और जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

श्री ट्रंप ने उल्लेख किया कि उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और आवश्यकतानुसार अन्य लोग इन वार्ताओं के लिए जिम्मेदार होंगे और सीधे उन्हें रिपोर्ट करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस ढांचे में 'सुरक्षा, खनिज और अन्य सभी चीजें' शामिल हैं।

दूसरी ओर, श्री रुटे ने फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार के दौरान इस ढांचे के बारे में विशिष्ट विवरण देने से परहेज किया और इस सवाल से बचते रहे कि क्या अमेरिका इस द्वीप का स्वामित्व अपने हाथ में लेगा। उन्होंने कहा, "हमने मूल रूप से इस बात पर चर्चा की कि हम राष्ट्रपति के विजन को कैसे लागू कर सकते हैं। हाँ, ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए, लेकिन न केवल ग्रीनलैंड, बल्कि पूरे आर्कटिक की सुरक्षा के लिए।"यह पूछे जाने पर कि क्या इस ढांचे के तहत डेनमार्क ग्रीनलैंड पर अपनी संप्रभुता बनाए रखेगा, श्री रुटे ने कहा कि 'यह मुद्दा सामने नहीं आया।'नाटो की प्रवक्ता एलीसन हार्ट ने कहा कि श्री रुटे ने श्री ट्रंप के साथ अपनी बैठक के दौरान 'संप्रभुता को लेकर कोई समझौता प्रस्तावित नहीं किया'। उन्होंने बैठक को 'उत्पादक' बताया और कहा कि यह ढांचा आर्कटिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए सहयोगियों के 'सामूहिक प्रयासों' पर केंद्रित होगा।

श्री हार्ट ने कहा, "डेनमार्क, ग्रीनलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बातचीत इस उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेगी कि रूस और चीन कभी भी ग्रीनलैंड में आर्थिक या सैन्य रूप से पैर न जमा सकें।"ट्रंप हफ्तों से डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दे रहे थे, जिससे नाटो सैन्य गठबंधन के भविष्य और 1.7 ट्रिलियन डॉलर के अटलांटिक पार व्यापार को लेकर चिंताएं पैदा हो गई थीं। उन्होंने डेनमार्क और सात अन्य यूरोपीय देशों पर एक फरवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसे एक जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की योजना थी।

श्री ट्रंप ने बार-बार डेनमार्क पर आर्कटिक में ग्रीनलैंड के क्षेत्रीय जल को सुरक्षित करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए तर्क दिया है कि क्षेत्र में चीन और रूस की महत्वाकांक्षाओं के कारण यह द्वीप अमेरिकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

दूसरी ओर, डेनमार्क ने कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और बलपूर्वक द्वीप पर कब्जा करने का कोई भी प्रयास नाटो को खतरे में डाल देगा। गौरतलब है कि 32 नाटो गठबंधन में अमेरिका और डेनमार्क दोनों शामिल हैं।

आयात शुल्क की घोषणा को वापस लेने का यह निर्णय श्री ट्रंप के दावोस में संबोधन के कुछ ही घंटों के बाद आया है। इस संबोधन में श्री ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए बल का प्रयोग नहीं करेंगे। उन्होंने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि केवल अमेरिका ही इस विशाल, खनिज समृद्ध क्षेत्र को 'सुरक्षित' कर सकता है। इससे दुनिया भर के नेताओं को राहत मिली कि ट्रंप सैन्य शक्ति का उपयोग करके ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का प्रयास नहीं करेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "लोगों ने सोचा कि मैं बल का प्रयोग करूँगा। मुझे बल प्रयोग करने की जरूरत नहीं है। मैं बल प्रयोग नहीं करना चाहता। मैं बल प्रयोग नहीं करूँगा।" उन्होंने कहा कि वह 'ग्रीनलैंड के अधिग्रहण पर एक बार फिर चर्चा करने के लिए तत्काल बातचीत की मांग करते हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित