मुंबई , अक्टूबर 07 -- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वैश्विक अनिश्चितताओं और भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका के मद्देनजर बुधवार को रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की। साथ ही अपना रुख भी कठोर कर दिया है जिससे भविष्य में दरें और बढ़ने की संभावना बन गई है।
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की आज समाप्त तीन दिवसीय बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय किया है। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक पूंजी उपलब्ध कराता है। साथ ही स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर 5.25 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर 5.75 कर दी गई है। दोनों में 0.25 फीसदी की वृद्धि की गई है।
रेपो दर बढ़ने के बैंकों के भी ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा करने की आशंका है। इससे होम लोन, व्यक्तिगत ऋण और उद्योगों के लिए पूंजी की लागत बढ़ सकती है।
श्री मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने बहुमत से अपना रुख कठोर करने के फैसला किया है। इसका मतलब है कि निकट भविष्य में नीतिगत दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है। इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा - अगली बैठकों में या तो इसे स्थिर रखा जाएगा या इसमें वृद्धि की जाएगी। समिति के छह सदस्यों में से चार ने रुख कठोर करने के पक्ष में मत दिया जबकि दो सदस्यों की राय थी कि इसे तटस्थ रखा जाना चाहिए।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इन फैसलों के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव, व्यापार को लेकर जारी अनिश्चितता, वैश्विक स्तर पर बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न का बढ़ना और एआई शेयरों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चतता हैं। सितंबर में पश्चिम एशिया संकट के एक बार फिर गहराने से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। इसका घरेलू मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक महंगाई दर को नियंत्रित रखने और वित्तीय स्थिरता दोनों के लिए काम करता रहेगा।
आरबीआई ने मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति (खुदरा महंगाई) का अनुमान पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही, पहली तिमाही के अच्छे आंकड़े आने के बाद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत की जगह अब 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है। कोर मुद्रास्फीति 4.4 प्रतिशत पर रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि अगस्त में खाद्य पदार्थों और ईंधन के दाम तेजी से बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ी है। लगभग सभी खाद्य पदार्थों में महंगाई दर ऊंची रही है।
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