लखनऊ , जनवरी 19 -- शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (आरटीई) के तहत फीस प्रतिपूर्ति समेत लंबित मुद्दों को लेकर प्रदेश के निजी स्कूलों ने सरकार से एक बार फिर समाधान की मांग उठाई है।

एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स, उत्तर प्रदेश ने कहा कि वर्षों से समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, जिससे हजारों निजी स्कूल आर्थिक दबाव में आ गए हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि फीस प्रतिपूर्ति आरटीई अधिनियम की धारा 12(2) के अनुसार ही निर्धारित होनी चाहिए, जिसमें सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले व्यय को आधार बनाया गया है।

सोमवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों को अभी भी शासनादेश के आधार पर 450 प्रति छात्र के मानक से भुगतान किया जा रहा है, जबकि वास्तविक खर्च इससे कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि प्रतिपूर्ति के रूप में शिक्षा विभाग पर करोड़ों रुपये बकाया हैं। भुगतान न होने के कारण कई स्कूल कर्ज में डूबकर बंद हो चुके हैं और अनेक स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। ऐसे में अगर समय रहते बकाया जारी नहीं हुआ तो बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है और अभिभावकों के सामने नई समस्या खड़ी होगी।

संगठन ने मांग की कि शैक्षिक सत्र 2013-14 से 2025-26 तक सरकारी प्राथमिक स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले व्यय को सरकारी गजट/शासनादेश के माध्यम से घोषित किया जाए और उसी आधार पर सभी वर्षों की बकाया प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाए। इसके अलावा दिल्ली और तमिलनाडु की तरह उत्तर प्रदेश में भी हर साल अक्टूबर में प्रति छात्र व्यय घोषित करने की व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित