नागपुर , जुलाई 30 -- सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत एसोसिएशन ऑफ सोशल एंड आरटीआई एक्टिविस्ट्स (एएसआरए) को प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र पुलिस बल में लगभग 20 हजार पद रिक्त हैं, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ गयी है।

एएसआरए के अध्यक्ष संजय ठूल ने गुरुवार को बताया कि बड़ी संख्या में रिक्त पदों के कारण कार्यरत पुलिसकर्मियों पर काम का बोझ काफी बढ़ गया है। इससे आपराधिक मामलों की जांच में देरी हो रही है और पूरे राज्य में पुलिस व्यवस्था की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।

आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस उपनिरीक्षक (पीएसआई) के 2,878 पद रिक्त हैं। इस कमी के कारण कार्यरत अधिकारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे साक्ष्य जुटाने, आरोप पत्र दाखिल करने और मामलों के निस्तारण में देरी हो रही है। इसके परिणामस्वरूप अदालतों में लंबित मामलों की संख्या भी बढ़ रही है।

पुलिस बल में आरक्षकों (कांस्टेबल) की भी कमी है और 16,500 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं।

श्री ठूल ने कहा कि इस कमी का असर नियमित गश्त और कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी पर पड़ा है। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती राजनीतिक रैलियों, त्योहारों और विशिष्ट व्यक्तियों (वीआईपी) की सुरक्षा में होने के कारण रिहायशी इलाकों में पुलिस की मौजूदगी कम हो गयी है।

उन्होंने कहा कि कर्मियों की कमी और पुलिसकर्मियों के बीमार रहने के कारण अनेक पुलिसकर्मियों को सप्ताहिक अवकाश के बिना प्रतिदिन 12 से 16 घंटे तक काम करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक दबाव में काम करने से पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण भी प्रभावित हो रहा है।

श्री ठूल ने कहा कि कर्मियों की कमी के कारण नियमित रात्रि गश्त और संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना कठिन हो गया है, जिससे घरों में चोरी, महिलाओं के खिलाफ अपराध और साइबर अपराध जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ गया है।

आरटीआई के जवाब में यह भी सामने आया है कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) से लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) स्तर तक वरिष्ठ अधिकारियों के 30 पद भी रिक्त हैं। इन रिक्तियों के कारण योजना निर्माण, निगरानी और रणनीतिक निर्णय लेने में देरी हो रही है तथा कई वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ कई पदों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे प्रशासनिक दक्षता प्रभावित हो रही है।

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