बैतूल , अगस्त 26 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर ग्राम पंचायत खेड़ी सांवलीगढ़ के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। सीनियर सिटीजन संगठन के अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र गिरि ने आरोप लगाया है कि पंचायत के लोक सूचना अधिकारी ने उनके 15 आरटीआई आवेदनों को अलग-अलग आधार पर अमान्य कर दिया। उन्होंने मामले में कलेक्टर से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

डॉ. गिरि के अनुसार उन्होंने 13 फरवरी से 23 जून 2026 के बीच ग्राम पंचायत खेड़ी सांवलीगढ़ के लोक सूचना अधिकारी एवं सचिव के समक्ष कुल 15 आवेदन प्रस्तुत कर शासकीय कार्यों और योजनाओं से संबंधित जानकारी मांगी थी। उनका कहना है कि निर्धारित 30 दिन की अवधि में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्होंने जनपद पंचायत बैतूल के प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष चार प्रथम अपीलें प्रस्तुत कीं, लेकिन करीब 50 दिन बीतने के बाद भी इन पर सुनवाई नहीं हुई।

उन्होंने बताया कि चार मई को जनपद पंचायत को पत्र भेजकर ग्राम पंचायत को आवश्यक निर्देश देने की मांग भी की गई थी, लेकिन इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

डॉ. गिरि ने पंचायत के पत्र क्रमांक 60, दिनांक एक जून 2026 का हवाला देते हुए कहा कि इसमें बार-बार आरटीआई आवेदन प्रस्तुत करने से पंचायत का समय बर्बाद होने और ग्राम विकास प्रभावित होने की बात कहते हुए आवेदन को विधिमान्य नहीं माना गया। इसी तरह एक अन्य पत्र में आवेदनों की छायाप्रति सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आवेदक की बताते हुए आवेदन को अमान्य करने की बात कही गई है।

डॉ. गिरि का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई आरटीआई अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है। उनका कहना है कि लोक सूचना अधिकारी का दायित्व आवेदक को सूचना उपलब्ध कराने में सहयोग करना है, न कि उसे हतोत्साहित करना।

उन्होंने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कर ग्राम पंचायत के लोक सूचना अधिकारी तथा जनपद पंचायत बैतूल के प्रथम अपीलीय अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। साथ ही भविष्य में नागरिकों के आरटीआई अधिकारों के साथ इस प्रकार का व्यवहार नहीं होने देने की मांग की है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित