जयपुर , फरवरी 13 -- राजस्थान सरकार ने राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना (आजीएचएस) में अनियमितता के मामले में सात और चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है तथा एक अस्पताल एवं एक डायग्नोस्टिक सेंटर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरजीएचएस योजना के सुचारू संचालन की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। योजना में ऑडिट के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर सीकर जिले में पदस्थापित सात चिकित्सकों को निलंबित किया गया है। मेडिकल कॉलेज सीकर में कार्यरत अस्थि रोग विभाग के सह आचार्य डॉ. कमल कुमार अग्रवाल एवं डॉ. सुनील कुमार ढाका एवं जनरल मेडिसिन विभाग के सह आचार्य डॉ. मुकेश वर्मा, सीएचसी किरवा के डॉ. राकेश कुमार, एसके अस्पताल के डॉ. गजराज सिंह, डॉ. एसएस राठौड़ तथा डॉ. सुनील शर्मा को निलंबित किया गया है।

इसी प्रकार योजना में अनियमितता कर अनुचित लाभ लेने पर भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम तथा बीकानेर के बोथरा डायग्नोस्टिक एण्ड इमेजिंग सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा गया है।

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह तथ्य गंभीर रूप से उजागर हुआ है कि भरतपुर स्थित कशिश फार्मेसी एवं भरतपुर नर्सिंग होम द्वारा मिलीभगत कर आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा कर राजकोष को भारी हानि पहुँचाई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल की डॉक्टर संगीता अग्रवाल द्वारा आरजीएचएस में पूर्व में अनुमोदित ना होते हुए भी आरजीएचएस का बोर्ड लगाकर लाभार्थियों को आरजीएचएस से सुविधा देने का प्रलोभन दिया। अपने अस्पताल में आरजीएचएस कार्ड धारकों का इलाज किया एवं टीआईडी जनरेट करने के लिए उनके एसएसओ आईडी पासवर्ड लिए तथा उपचार उपरान्त अपने ही अस्पताल की कशिश फार्मेसी से जांचें एवं दवाइयों को फर्जी तरीके से आरजीएचएस पोर्टल पर एडजेस्ट कर भुगतान प्राप्त किया।

उन्होंने बताया कि दोनों संस्थानों ने मिलीभगत कर लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर क्लेम स्वीकृत करवाने की कोशिश की, जिससे प्रत्यक्ष रूप से राजकोष को हानि पहुँची है। अस्पताल को आरजीएचएस योजना से पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है। अब एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है।

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