हैदराबाद , फरवरी 23 -- तेलंगाना की राजधानी स्थित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (आरजीआईए) तेलंगाना के लिये एक मुख्य विकास इंजन के रूप में उभरा है।

भारतीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) की ओर से अक्टूबर 2025 में जारी आर्थिक प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, निर्गत सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) और रोजगार सृजन के लिए टाइप-एकI और टाइप-दो मल्टीप्लायरों के माध्यम से आरजीआईए के प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और प्रेरित आर्थिक प्रभावों को मापने के लिए एक मजबूत आगत-निर्गत (आईओ) ढांचे का उपयोग किया गया है।

रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि आरजीआईए ने अनुमानित 68,000 करोड़ रुपये का सकल मूल्य संवर्धन उत्पन्न किया, जो तेलंगाना की अर्थव्यवस्था के लगभग 4.6 प्रतिशत के बराबर है। इसके अतिरिक्त यह हवाई अड्डा 3.5 लाख प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और प्रेरित नौकरियों का समर्थन करता है।

इसमें आगे कहा गया है कि जब इसे विस्तारित जीएमआर एयरोसिटी के साथ जोड़ा जाता है, तो इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का कुल प्रभाव बढ़कर 75,000 करोड़ रुपये सकल मूल्य संवर्धन और लगभग 4.1 लाख नौकरियों तक पहुंच जाता है। यह भारत के विमानन-आधारित विकास में आरजीआईए के संरचनात्मक महत्व को दर्शाता है।

वर्ष 2008 से परिचालन में रहने वाला आरजीआईए एक 'ग्रीनफील्ड पीपीपी' (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) हवाई अड्डे से विकसित होकर अब पूरे राज्य के लिए एक आर्थिक उत्प्रेरक बन गया है। यह हैदराबाद शहर और तेलंगाना के लिए रोजगार, व्यापार, निवेश आकर्षण और वैश्विक संपर्क को बढ़ावा देता है। यह हवाई अड्डा अपनी सीमाओं से कहीं आगे आपूर्ति शृंखलाओं और घरेलू खर्च के माध्यम से मूल्य सृजन को कई गुना बढ़ाता है।

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