दरभंगा , अगस्त 27 -- िहार के दरभंगा के पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए आय आधारित पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग करते हुए कहा है कि आरक्षण का वास्तविक लाभ समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।श्री गामी ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि इसके लिए सरकार को सभी पक्षों की सहमति से व्यावहारिक मॉडल तैयार करना चाहिए। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के दो लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चों को मैट्रिक तक सरकारी छात्रावास में रखकर नि:शुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का सुझाव दिया।
श्री गामी ने कहा कि दो लाख से अधिक और आठ लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों के बच्चों को भी सबसे कम आय वाले बच्चों को प्राथमिकता देते हुए मैट्रिक तक नि:शुल्क शिक्षा तथा मांग के आधार पर छात्रावास की सुविधा दी जानी चाहिए। उन्होंने ओबीसी ,इबीसी और सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों के बच्चों के लिए भी इसी प्रकार की शैक्षणिक सुविधा देने तथा वर्तमान आरक्षण प्रतिशत को जारी रखने का सुझाव दिया।
पूर्व विधायक श्री गामी ने कहा कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण जारी रहना चाहिए और अनुसूचित जाति एवं जनजाति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन मेरिट से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में आरक्षित वर्ग की सीटें डिग्री के आधार पर सीधे भरने तथा प्रतियोगिता परीक्षा की आवश्यकता समाप्त करने का भी सुझाव दिया।
श्री गामी ने राजनीतिक आरक्षण के संबंध में कहा कि एक बार निर्वाचित व्यक्ति अथवा परिवार को दोबारा उसी अवसर का लाभ नहीं मिलना चाहिए, जिससे रोटेशन के माध्यम से अधिक लोगों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके।
उन्होंने जनगणना में संपत्ति की स्व-घोषणा के लिए अलग कॉलम रखने और आठ लाख रुपये से कम आय के आधार पर लाभ लेने वालों से शपथ पत्र लेने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य गरीबों को परेशान करना नहीं, बल्कि फर्जी तरीके से लाभ लेने वालों पर रोक लगाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निर्धारित आय वर्ग के लोगों के साथ जोर-जुल्म होने की स्थिति में उन्हें पूर्ण कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए। परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कदाचार पर रोक लगाने और परीक्षा में सफल होने के बाद ही अगली कक्षा में प्रमोशन देने का भी उन्होंने सुझाव दिया।
पूर्व विधायक ने सरकार से विपक्ष को साथ लेकर जनमत संग्रह कराने तथा प्रत्येक वर्ग के विद्वानों को उनके आरक्षण अनुपात के आधार पर समिति में शामिल कर व्यापक विचार-विमर्श के बाद कानून बनाने की मांग की।उन्होंने कहा कि उनका सुझाव किसी वर्ग के विरोध में नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को पहले मजबूत करने के उद्देश्य से है। ऐसी व्यवस्था लागू होने पर दस वर्षों में आरक्षण की सार्थकता जमीन पर दिखाई देगी और देश अधिक खुशहाल बनेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित