पुणे , अगस्त 09 -- रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवाड़ी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरक्षण केवल एक अस्थायी सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता और भेदभाव को दूर करने के लिए संविधान द्वारा दिया गया एक मौलिक और संवैधानिक अधिकार है।
डॉ. चलवाड़ी ने कहा कि समाज से अभी तक पूरी तरह से सामाजिक भेदभाव समाप्त नहीं हुआ है और हाशिए पर मौजूद, शोषित और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को आज भी शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान के मामले में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए, जब तक सामाजिक न्याय का लाभ समाज के अंतिम और सबसे वंचित व्यक्ति तक नहीं पहुँच जाता, तब तक आरक्षण अनिवार्य रूप से जारी रहना चाहिए।
आरएसएस प्रमुख के इस बयान का स्वागत करते हुए कि जब तक समाज में भेदभाव है, तब तक आरक्षण जरूरी है, डॉ. चलवाड़ी ने कहा कि आरक्षण को केवल सामाजिक उत्थान का माध्यम या एक ऐसी व्यवस्था के रूप में देखना उचित नहीं है जो एक निश्चित समय के बाद समाप्त हो जाए।
आरपीआई नेता ने कहा कि आरक्षण वंचित वर्गों को भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त एक अधिकार है, जो समाज में समानता और न्याय स्थापित करने के व्यापक संवैधानिक उद्देश्य से जुड़ा हुआ है।
डॉ. चलवाड़ी ने कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उन्हें दूसरों के लिए भी लिए भी अवसर छोड़ने चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत है।
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