बेंगलुरु , अक्टूबर 07 -- कर्नाटक में बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में कथित टिप्पणियों को लेकर राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड़ के खिलाफ दायर मानहानि के मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दी।

विशेष न्यायाधीश के.बी. शिवप्रसाद ने कहा कि अदालत को पहले यह देखना होगा कि शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति को ऐसा करने का अधिकार है या नहीं।अदालत ने शिकायतकर्ता ए. तेजस को नोटिस जारी किया और मामले से जुड़े रिकॉर्ड मंगाये। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के मामला दर्ज करने के अधिकार का मुद्दा महत्वपूर्ण है और मुकदमे की आगे की कार्यवाही शुरू होने से पहले इसकी जांच की जानी चाहिए।

श्री खरगे और श्री नलपाड़ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356 के तहत मामला दर्ज किया गया था। मजिस्ट्रेट अदालत ने पहले शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दोनों नेताओं को समन जारी किया था। श्री खरगे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप जे. चौटा ने दलील दी कि तेजस ने आरएसएस से अपने कथित संबंधों को लेकर अलग-अलग बयान दिये हैं। उन्होंने कहा कि तेजस के आरएसएस का सदस्य होने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने यह भी दलील दी कि इसलिए तेजस यह दावा नहीं कर सकता कि कथित टिप्पणियों से वह सीधे प्रभावित हुआ है और वह मानहानि का मामला दायर कर सकता है।

श्री नलपाड़ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम हुइलगोल ने कहा कि कानून के तहत मानहानि की शिकायत उसी व्यक्ति द्वारा दर्ज की जानी चाहिए, जो सीधे तौर पर प्रभावित हुआ हो। उन्होंने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट ने श्री नलपाड़ के खिलाफ मामले का संज्ञान लेने के लिए उचित कारण नहीं बताये थे।

विशेष अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने पहले यह फैसला किया था कि तेजस को शिकायत दर्ज करने का अधिकार है या नहीं, इस सवाल पर सुनवाई के दौरान विचार किया जा सकता है।

विशेष अदालत ने हालांकि कहा कि इस मुद्दे की जांच इसी चरण में की जानी जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं को पहले ही समन जारी किये जा चुके हैं और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है। अदालत ने कहा कि यदि कार्यवाही जारी रहती है तो इससे पुनरीक्षण याचिकाओं के उद्देश्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए अदालत ने मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित