बिलासपुर , अक्टूबर 24 -- देश में विपक्षी आंदोलनों और जेन-जी की आक्रामकता के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने युवाओं और महिलाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया है। इसके तहत युवाओं एवं महिलाओं को संगठन से जोड़ने के लिए गतिविधियों का विस्तार करने, स्कूल-कॉलेजों में संपर्क बढ़ाने और घर-घर तक पहुंच बनाने की योजना पर चर्चा हुई है। नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए पांचवीं-छठवीं कक्षा के बच्चों को शाखाओं से जोड़ने के उद्देश्य से भी गतिविधियां शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में क्षेत्र और प्रांत के अधिकारियों तथा विभाग की टोलियों के साथ शुक्रवार सुबह से लेकर देर रात तक हुई चर्चा में इन विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। विजयादशमी पर्व के सिलसिले में दो दिवसीय प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे भागवत ने प्रांत एवं विभाग की टोलियों के साथ-साथ सभी आनुषांगिक संगठनों के अधिकारियों से भी चर्चा की। इस दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के तहत निर्धारित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

दो दिनों की बैठकों में जेन-जी आंदोलनों और विपक्षी आख्यान का जवाब देने के लिए युवाओं एवं महिलाओं पर केंद्रित गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में शाखाओं के विस्तार को बनाए रखने और नई शाखाएं शुरू करने पर भी चर्चा हुई।

शुक्रवार को भोजन से पहले दो सत्रों में बैठकें आयोजित की गईं। इसके बाद समापन सत्र में आरएसएस प्रमुख ने बौद्धिक वर्ग में दिए गए अपने संदेश को दोहराते हुए शताब्दी वर्ष के अंतर्गत शुरू किए गए कार्यों को निरंतर जारी रखने पर जोर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में गांव-गांव तक पहुंच बनाने के साथ शहरी इलाकों की बस्तियों में भी संपर्क बढ़ाने की बात कही गई।

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मुद्दे पर भी बैठकों में चिंता जताई गई। आरएसएस के साथ विश्व हिंदू परिषद और धर्म जागरण सहित अन्य संगठन इस विषय पर काम कर रहे हैं। संगठनों की ओर से यह बात सामने रखी गई कि कथित जबरन धर्मांतरण के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रशासन का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता और कई बार पुलिस की कार्रवाई का सामना भी उन्हें करना पड़ता है। उनका कहना था कि धर्मांतरण कराने वालों की कानूनी स्थिति अधिक मजबूत रहती है।

इस विषय पर डॉ. मोहन भागवत ने संदेश दिया कि प्रलोभन देकर या बलपूर्वक धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ काम जारी रखना है और इससे डरने की जरूरत नहीं है।

बैठक में नीट पेपर लीक और इसके बाद हुए आंदोलन का मुद्दा भी उठा। इस पर भागवत ने स्पष्ट संदेश दिया कि इस तरह की गलतियों का मौका नहीं दिया जाना चाहिए।

चर्चा के दौरान यह विचार भी सामने आया कि दुनिया के दूसरे देशों में जिस तरह के आंदोलन हो रहे हैं, उनका वैसा प्रभाव भारत में नहीं पड़ेगा। इसके पीछे तर्क दिया गया कि आंदोलनों में शामिल लोगों के मंसूबे धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं और लोग नीट तथा एसआईआर जैसे आंदोलनों के पीछे छिपे उद्देश्यों को समझने लगे हैं।

दो दिवसीय चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ प्रांत से पहुंचे स्वयंसेवकों से क्षेत्र और प्रांत प्रचारकों ने विभिन्न मुद्दों पर इनपुट लिया। इसमें जर्जर सड़कों सहित बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। इस दौरान संदेश दिया गया कि लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए।

चर्चा में यह बात भी सामने आई कि यदि वैश्विक परिस्थितियों के कारण नई सड़क बनाने में कठिनाई आ रही है, तो लोगों को राहत देने के लिए मौजूदा सड़कों का रखरखाव और मरम्मत कर काम चलाया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में महिला मतदाताओं की संख्या एक करोड़ से अधिक, जबकि युवा मतदाताओं की संख्या 50 लाख से ज्यादा बताई गई है। ऐसे में युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित संघ की गतिविधियों का राजनीतिक रूप से भाजपा को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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