गांधीनगर , जनवरी 31 -- केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महत्व की संस्था राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) ने हाल ही में द्वितीय अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक अनुसंधान सम्मेलन (आईओआरसी 2026) का सफलतापूर्वक समापन किया।
आरआरयू की ओर से शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इस सम्मेलन में चार रणनीतिक विषयों के अंतर्गत 40 से अधिक विशेषज्ञ सत्र आयोजितकिये गये। शिक्षा, शासन और डोपिंग विरोधी, अनुसंधान और अभ्यास, और मेगा-इवेंट आयोजन रणनीतियां। ग्रीस, पोलैंड, जर्मनी, ब्राजील, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और मॉन्ट्रियल स्थित वाडा मुख्यालय के प्रतिभागियों के साथ-साथ भारतीय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की उपस्थिति में, आईओआरसी 2026 ओलंपिक अध्ययन के वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण क्षण था।
भारत सेंटर ऑफ ओलंपिक रिसर्च एंड एजुकेशन (बीसीओआरई) द्वारा आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में विश्व भर के अग्रणी ओलंपिक विद्वान, खेल प्रशासन विशेषज्ञ, डोपिंग विरोधी विशेषज्ञ और उच्च प्रदर्शन सलाहकार एक साथ आये, जिससे भारत वैश्विक ओलंपिक ज्ञान और अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरा।
उन्होंने कहा कि 27-30 जनवरी तक आयोजित चार दिनों की ओलंपिक उत्कृष्टता, भारत के ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण सम्मेलन का शुभारंभ एक उद्घाटन समारोह के साथ हुआ, जिसमें ओलंपिक विरासत और भारतीय दृष्टिकोण का संगम हुआ। ग्रीस स्थित अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक अकादमी के निदेशक प्रोफेसर माकिस असिमाकोपोलोस मुख्य अतिथि थे, उनके साथ आरआरयू के कुलपति प्रोफेसर बिमल एन.पटेल और विशिष्ट समर्थकों में भारतीय ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय पटेल और कर्णावती क्लब के मानद सचिव जयेश मोदी उपस्थित थे।
प्रोफेसर असिमाकोपोलोस के मुख्य भाषण में इस बात पर जोर दिया गया कि ओलंपिक शिक्षा खेल उपलब्धियों से परे जाकर चरित्र निर्माण और स्थायी खेल संस्कृति का निर्माण करती है, जिसने चार दिनों के गहन अकादमिक विमर्श की नींव रखी। यह सम्मेलन चार रणनीतिक विषयों पर केंद्रित था, जिनमें से प्रत्येक भारत की ओलंपिक यात्रा के लिए महत्वपूर्ण क्षमता क्षेत्रों को संबोधित करता था।
एलेक्जेंड्रा कारास्कौ (आईओए अध्यक्ष कार्यालय), प्रोफेसर डॉ. रवि प्रकाश रंजन (अफ्रीका बिजनेस स्कूल, यूएम6पी) सहित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और श्री रुश्दी वार्ले, प्रद्युत वोलेटी, नीलेश कुलकर्णी, डॉ. उषा नायर और सेड्रिक वैंडेन (कार्यकारी निदेशक, एआईएसटीएस) सहित एक प्रतिष्ठित पैनल ने स्कूलों, विश्वविद्यालयों और उच्च-प्रदर्शन अकादमियों को एकीकृत करने वाले सतत एथलीट विकास पारिस्थितिकी तंत्रों का पता लगाया।
डॉ. ग्रज़ेगोर्ज़ बोटविना (पोलिश ओलंपिक अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र के निदेशक), प्रोफ़ेसर वोल्फगैंग मैनिग (हैम्बर्ग विश्वविद्यालय में आर्थिक नीति के अध्यक्ष और 1988 सियोल ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता), और श्री एंडर्स पेटरसन (ब्राज़ीलियाई ओलंपिक समिति के बोर्ड सदस्य) के वर्चुअल रूप से जुड़े सत्रों में आधुनिक ओलंपिक प्रशासन, पारदर्शिता तंत्र और जवाबदेही के लिए रूपरेखा प्रस्तुत की गयी, जो भारत के नवगठित खेल प्रशासन अधिनियम 2015 और देश की 2036 ओलंपिक आकांक्षाओं को देखते हुए विशेष रूप से प्रासंगिक है।
दो दिवसीय व्यापक डोपिंग-विरोधी सत्र में विश्व के अग्रणी विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें प्रोफ़ेसर यानिस पिट्सिलाडिस (हांगकांग बैपटिस्ट विश्वविद्यालय) शामिल थे, जिन्होंने समग्र डोपिंग-विरोधी उपायों के लिए रूपरेखा प्रस्तुत की, डॉ. अंकुश गुप्ता (एनएडीए) ने भारत-केंद्रित डोपिंग-विरोधी रणनीतियों परचर्चा की, टोनी कनिंघम (वाडा शिक्षा प्रबंधक) मॉन्ट्रियल से वर्चुअल रूप से जुड़कर साक्ष्य-आधारित शिक्षा पर चर्चा की, डॉ. मयुमी यामामोटो (वाडा एशिया/ओशिनिया की निदेशक) ने क्षेत्रीय रणनीतियों पर बात की और प्रोफेसर अल्का बेओत्रा (राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला की पूर्व वैज्ञानिक निदेशक) ने प्रयोगशाला विज्ञान और पहचान पद्धतियों पर व्याख्यान दिया। इस गहन शोध से आरआरयू को वाडा-मान्यता प्राप्त एंटी-डोपिंग प्रयोगशाला विकसित करनेमें प्रत्यक्ष रूप से सहायता मिली।
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