खरगोन , अगस्त 31 -- मध्यप्रदेश में खरगोन जिले के मेनगांव थाना क्षेत्र के रामपुरा में आठ वर्षीय आयुष मानकर की संदिग्ध मौत का रहस्य घटना के करीब 20 दिन बाद भी पूरी तरह नहीं सुलझ पाया है। पुलिस अब डायटम टेस्ट के जरिए यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि आयुष की मौत पानी में डूबने से हुई थी या नहीं।

मेनगांव थाना प्रभारी एमआर रोमड़े ने बताया कि आयुष नौ अगस्त की शाम करीब साढ़े सात बजे दोस्तों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गया। परिजनों की तलाश के बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद उसी रात अपहरण का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की गयी।

श्री रोमड़े के अनुसार, एक किराना दुकान के सीसीटीवी फुटेज में आयुष अकेले जाते हुए दिखाई दिया था। इसके बाद पुलिस टीम और डॉग स्क्वॉड ने तलाश शुरू की, लेकिन कई दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला। 18 अगस्त को डॉग स्क्वॉड करीब एक किलोमीटर दूर बलिराम पाटीदार के खेत में स्थित एक कुएं तक पहुंचा। बिना मुंडेर और झाड़ियों से घिरे इस कुएं से पुलिस ने आयुष का शव बरामद किया।

खंडवा मेडिकल कॉलेज में कराए गए पोस्टमार्टम में शरीर पर मारपीट या गला दबाने के स्पष्ट निशान नहीं मिले। हालांकि, आयुष के खेलने की जगह और शव मिलने के स्थान के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी होने से पुलिस को प्रारंभ में किसी गंभीर अपराध की आशंका थी।

जांच के दौरान पुलिस को आयुष के दो दोस्तों के बारे में जानकारी मिली। इनमें एक की उम्र सात और दूसरे की 15 वर्ष है। दोनों को आयुष के लापता होने से कुछ समय पहले उसके साथ देखा गया था। पूछताछ में दोनों ने पहले स्पष्ट जानकारी नहीं दी, लेकिन बाद में बताया कि वे आयुष को खीरा खिलाने और कछुआ दिखाने के लिए अपने साथ ले गए थे। उनके अनुसार, कुएं के पास आयुष का पैर फिसल गया और वह उसमें गिर गया।

दोनों बच्चों ने पुलिस को बताया कि घटना के बाद वे डर गए थे और उन्हें आशंका थी कि आयुष के कुएं में गिरने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसी डर के कारण उन्होंने कई दिनों तक घटना की जानकारी पुलिस या अपने परिवारों को नहीं दी।

पुलिस ने दोनों बच्चों की मौजूदगी में घटनास्थल पर सीन रिक्रिएट भी कराया। इस दौरान मृतक के परिजन भी मौजूद रहे। थाना प्रभारी ने कहा कि फिलहाल पुलिस और परिवार ने किसी को क्लीन चिट नहीं दी है।

श्री रोमड़े ने बताया कि बच्चों द्वारा बताई गई घटना को पुलिस फिलहाल मौत का संभावित कारण मान रही है, लेकिन मामले को बंद करने से पहले पूरी तरह सुनिश्चित होना चाहती है। पोस्टमार्टम से मौत का कारण निर्णायक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है। इसलिए कुएं के पानी और आयुष की हड्डी के नमूने सोमवार को डायटम टेस्ट के लिए भेजे जाएंगे। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि उसकी मौत डूबने से हुई थी या नहीं।

आयुष के परिजनों ने जांच पर अब तक संतोष नहीं जताया है और उन्हें आशंका है कि घटना के पीछे कुछ और भी हो सकता है। पुलिस का कहना है कि डायटम टेस्ट की रिपोर्ट सहित जांच के सभी पहलुओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि डायटम टेस्ट एक फोरेंसिक जांच है, जिसका इस्तेमाल यह पता लगाने में मदद के लिए किया जाता है कि किसी व्यक्ति की मौत डूबने से हुई थी या नहीं। जीवित अवस्था में पानी में डूबने पर पानी में मौजूद सूक्ष्म जीव डायटम सांस के साथ फेफड़ों में पहुंच सकते हैं और रक्त प्रवाह के जरिए शरीर के कुछ ऊतकों, विशेषकर हड्डियों या अस्थिमज्जा तक पहुंच सकते हैं।

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