भोपाल , अक्टूबर 04 -- मध्यप्रदेश के निजी अस्पतालों ने लंबित भुगतान, क्लेम में कटौती और अन्य समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर 08 अक्टूबर से आयुष्मान भारत योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मध्यप्रदेश और यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन (यूपीएचडीए) सहित विभिन्न अस्पताल संगठनों ने यह घोषणा की है।

आईएमए मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. भजनलाल शरणागत ने कहा कि अस्पतालों के पुराने एवं वर्तमान पोर्टल पर भुगतान लंबित है। इसके अलावा सीपीडी स्तर पर क्लेम अटके हैं तथा क्लेम रिजेक्शन और अनावश्यक कटौती जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। इन समस्याओं को शासन के समक्ष ज्ञापन, बैठकों, प्रतिनिधिमंडलों और सांकेतिक विरोध के माध्यम से रखा गया, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हो सका।

अस्पताल संगठनों का कहना है कि मरीज के उपचार से पहले बीमारी, प्रस्तावित उपचार और पैकेज के आधार पर प्री-ऑथराइजेशन लिया जाता है। इसके बाद अस्पताल अपने संसाधनों और खर्च पर मरीज का उपचार करते हैं। ऐसे में उपचार पूरा होने के बाद बिना ठोस कारण वैध क्लेम को रिजेक्ट अथवा बड़ी राशि की कटौती किए जाने से अस्पतालों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो रहा है।

यूपीएचडीए मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने कहा कि अस्पताल लंबे समय से लंबित भुगतान और नीतिगत एवं प्रक्रियागत समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समस्याओं का संतोषजनक समाधान होने तक अस्पताल संगठन संयुक्त आंदोलन में एकजुट रहेंगे। उन्होंने लंबित भुगतान और क्लेम संबंधी समस्याओं के समयबद्ध समाधान तथा भुगतान की निश्चित समय-सीमा और जवाबदेही तय करने की मांग की।

यूपीएचडीए मध्यप्रदेश के चेयरमैन एडवाइजरी डॉ. जीशान अहमद ने कहा कि वास्तविक मरीज, बीमारी और उपचार के बावजूद केवल तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से वैध क्लेम रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पताल संगठन दिल्ली में एक हजार एम्बुलेंस के साथ जाकर जिम्मेदारों के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

अस्पताल संगठनों ने आयुष्मान योजना में एनएबीएच की अनिवार्यता समाप्त कर इसे स्वैच्छिक एवं प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों का वे समर्थन करते हैं, लेकिन मानक अस्पताल के आकार, बिस्तरों की संख्या, आधारभूत सुविधाओं और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप व्यावहारिक होने चाहिए।

संगठनों के अनुसार प्रदेश में आयुष्मान भारत 'निरामयम्' योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए 01 अक्टूबर से नई शर्त लागू हुई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में योजना से संबद्ध अस्पतालों के लिए एनएबीएच प्रमाणपत्र जरूरी है। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार इन चार शहरों में योजना से 739 अस्पताल संबद्ध हैं, जिनमें 310 के पास एनएबीएच प्रमाणपत्र है। सरकारी अस्पतालों को अलग करने पर करीब 300 निजी अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता नए नियम से प्रभावित हो सकती है।

अस्पताल संचालकों ने तकनीकी कारणों से रिजेक्ट होने वाले क्लेम के लिए पारदर्शी व्यवस्था, प्रत्येक क्लेम रिजेक्शन या कटौती का स्पष्ट लिखित कारण, योग्य चिकित्सकों द्वारा क्लेम की जांच, प्रभावी अपील व्यवस्था और पैकेज दरों का वास्तविक चिकित्सा खर्च के अनुरूप पुनरीक्षण करने की मांग की है।

आईएमए मध्यप्रदेश अध्यक्ष डॉ. शरणागत और यूपीएचडीए मध्यप्रदेश अध्यक्ष डॉ. बघेल ने कहा कि यदि 08 अक्टूबर से पहले शासन द्वारा अस्पताल प्रतिनिधियों के साथ सार्थक संवाद कर समस्याओं का ठोस एवं लिखित समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेशभर में आयुष्मान भारत योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू किया जाएगा।

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