तेहरान , मार्च 12 -- ईरान के नवनियुक्त और तीसरे सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कार्यभार संभालने के बाद राष्ट्र के नाम अपने प्रथम संदेश में कहा है कि इजरायल-अमेरिका हमले में मारे गये ईरानियों की मौत का बदला लिया जायेगा और ईरान पड़ोसी देशों में बने अमेरिकी ठिकानों पर हमले करना जारी रखेगा।

सर्वोच्च नेता ने अपने संदेश में संघर्ष के दौरान मारे गये लोगों का जिक्र करते हुए कहा, "ईरान अपने शहीदों के खून का बदला लेने से पीछे नहीं हटेगा।"श्री खामेनेई ने मिनाब के बालिका विद्यालय पर हुए अमेरिकी मिसाइल हमले में जान गंवाने वाली 168 बालिकाओं का भी ज़िक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की सैन्य रणनीति केवल बचाव तक सीमित नहीं है। संदेश में चेतावनी दी गयी कि यदि आवश्यक हुआ, तो ईरान मौजूदा संघर्ष के बीच 'अन्य मोर्चे' भी खोल सकता है, जो पूरे क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है।

श्री खामेनेई का संदेश लिखित था और इसे सरकारी टीवी पर महिला एंकर ने पढ़कर सुनाया। इसमें श्री खामेनेई ने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा जाना चाहिए।" उन्होंने इसे दुश्मनों पर दबाव बनाने का एक प्रभावी जरिया करार दिया। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है और उसका लक्ष्य केवल वे अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, जहां से ईरान के खिलाफ हमले किये जा रहे हैं। संदेश में इस बात का कोई संकेत नहीं दिया गया कि नये सर्वोच्च नेता वर्तमान में कहां हैं, या उनकी स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति कैसी है।

कुछ समाचारों में उन्हें घायल बताया गया था। श्री खामेनेई का बयान ऐसे समय में आया है, जब इजरायल और अमेरिका का ईरान के साथ टकराव 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है और इनके बीच तनाव चरम पर है। उन्होंने अपने पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई का स्थान लिया है, जिनकी इजरायल-अमेरिका के हमले में 28 फरवरी को मौत हो गयी थी।

इससे पूर्व, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने बताया कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले शुरू होने के बाद से अब तक करीब 32 लाख ईरानी नागरिक देश के भीतर ही विस्थापित हो चुके हैं।

यूएनएचसीआर की आपातकालीन सहायता टीम के प्रमुख और मध्य पूर्व आपातकालीन शरणार्थी प्रतिक्रिया समन्वयक अयाकी इतो ने कहा कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार, चल रहे संघर्ष के परिणामस्वरूप ईरान के भीतर 6 लाख से 10 लाख परिवार अस्थायी रूप से विस्थापित हुए हैं।

इस बीच, इजरायली सेना ने गुरुवार को दावा किया कि उसने कुछ दिन पहले ईरान की राजधानी तेहरान स्थित 'तालेघन' परमाणु केन्द्र पर बड़ा हमला किया है। इजरायल का कहना है कि ईरान इस केन्द्र का इस्तेमाल अपनी परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने और परमाणु हथियार विकसित करने के लिए कर रहा था।

इजरायली सैन्य बयान के अनुसार, पिछले कुछ दिनों के भीतर तालेघन परिसर को निशाना बनाया गया है। इजरायल का आरोप है कि इस केंद्र का उपयोग हाल के वर्षों में उन्नत विस्फोटकों को विकसित करने और 'अमाद प्रोजेक्ट' से संबंधित प्रयोगों के लिए किया जा रहा था। इजरायल 'अमाद' को ईरान का एक गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम बताता है।

अमेरिका-इजरायल के लिये यह युद्ध खर्चीला साबित हो रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अधिकारियों ने अमेरिकी सांसदों को जानकारी दी है कि ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के पहले छह दिनों में ही 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का खर्च आ चुका है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तेजी से युद्ध का खर्च बढ़ रहा है, वह अमेरिकी बजट और घरेलू राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। विशेष रूप से तब, जब यह अभियान लंबा खिंचने के आसार दिख रहे हैं।

युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 130 से अधिक देशों के साथ बुधवार को उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें खाड़ी देशों और जॉर्डन के खिलाफ ईरान के हालिया 'भीषण' हमलों की निंदा की गई है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित