रामनगर , मार्च 17 -- उत्तराखंड में पर्यटन नगरी रामनगर जीआई टैग वाली लीची के लिए विश्व प्रसिद्ध है और यहां के आम देश-विदेश में अपनी मिठास के लिए जाने जाते हैं, इन दिनों रामनगर के बागान और बौर से लदगड हैं, जहां बागानों से निकलने वाली सुगंध जहां वातावरण को खुशबूदार बना रही है, वहीं हवा में फैल रहे परागकण लोगों के स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। इससे आंखों की एलर्जी के साथ ही अस्थमा के मरीजों को परेशानी हो रही है, साथ ही लोगों में आंखों में जलन, खुजली, छींकें और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

स्थानीय डॉक्टरों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में एलर्जी और श्वसन संबंधी मरीजों की संख्या में काफी तेजी से इजाफा हो रहा है,अस्पतालों और क्लीनिकों में ऐसे मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं, जिन्हें बौर के पोलन के कारण दिक्कत हो रही है।

वहीं इस संबंध में जानकारी देते हुए रामनगर के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. रज़ा बैग ने बताया कि फरवरी से अप्रैल के बीच आम और लीची और अन्य पौधों में फ्लावरिंग का समय होता है। इस दौरान वातावरण में इस वक़्त बहुत अधिक मात्रा में पोलन फैल जाता है, जिससे कई लोगों को एलर्जी की समस्या होने लगती है, या फिर सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

उन्होंने बताया कि इसके सामान्य लक्षणों में आंखों में खुजली, लाल होना, पानी आना, बार-बार छींक आना और सांस लेने में तकलीफ शामिल होती है और इस वक़्त रामनगर में ऐसे मरीज रोजाना बढ़ रहे है। डॉ. बैग ने बताया कि यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम होने के कारण होता है। उन्हाेंने कहा कि जब पोलन कण शरीर में प्रवेश करते हैं तो शरीर उन्हें बाहरी तत्व समझकर प्रतिक्रिया करता है, जिससे एलर्जी के लक्षण सामने आते हैं।

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