चंडीगढ़ , मार्च 30 -- पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने सोमवार को नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) में राज्य के शीर्ष स्थान पर आने को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसा है।

उन्होने कहा कि जब वर्ष 2021 में पंजाब ने इसी सर्वेक्षण में पहला स्थान प्राप्त किया था, तब आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे "हेरफेर" करार दिया था। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय दिल्ली के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी टिप्पणी की थी कि पंजाब की रैंकिंग तत्कालीन कांग्रेस सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच "समझौते" का परिणाम है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "क्या अब हम भी वही बातें दोहराएं?" उन्होंने दावा किया कि 2017 से 2022 के बीच कांग्रेस सरकार द्वारा रखी गई मजबूत नींव के कारण ही पंजाब दोबारा शीर्ष पर पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार केवल "विज्ञापनों तक सीमित शिक्षा नीति" चला रही है।

उन्होंने ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को "गहरे संकट" में बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन घट रहा है, शिक्षकों की भारी कमी है और अवसंरचना में गंभीर कमियां हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में लोगों का भरोसा कम हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि 15 से कम विद्यार्थियों वाले प्राथमिक स्कूलों की संख्या 237 से बढ़कर 276 हो गई है, जबकि अपर प्राइमरी स्तर पर यह संख्या 54 से बढ़कर 89 हो गई है, जो छात्रों के सरकारी स्कूलों से दूर जाने का संकेत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के गृह जिले संगरूर में भी 1,661 छात्रों ने सरकारी प्राथमिक स्कूल छोड़े हैं और "फर्जी नामांकन" के मामले सामने आए हैं।

शिक्षक रिक्तियों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न स्तरों पर 6,423 पद खाली पड़े हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि उच्च माध्यमिक स्तर पर रिटेंशन दर लगभग 66 प्रतिशत रह गई है, यानी लगभग एक-तिहाई छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 18 प्रतिशत से अधिक प्राथमिक और 23 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात में असंतुलन है। 32 गांवों में प्राथमिक स्कूल और छह गांवों में अपर प्राइमरी स्कूल नहीं हैं, जो शिक्षा के अधिकार के क्रियान्वयन पर सवाल उठाता है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि 179 आधारभूत ढांचा परियोजनाएं अधूरी हैं, 733 परियोजनाएं शुरू नहीं हुईं और 1,000 से अधिक कार्य लंबित हैं। वारिंग ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की उपलब्धियों का श्रेय लेने के बजाय राज्य सरकार को सभी शिक्षक रिक्तियां भरनी चाहिए, प्रत्येक गांव में आरटीई के अनुसार स्कूल सुनिश्चित करने चाहिए, लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करना चाहिए और शिक्षा को प्रचार से ऊपर प्राथमिकता देनी चाहिए।

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