रायपुर , फरवरी 20 -- आम आदमी पार्टी ने छत्तीसगढ़ सरकार पर लोगों के शिक्षा के मौलिक अधिकार की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
आप ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत छह से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी की गयी है। इसके बावजूद प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर इस अधिकार की अनदेखी कर रही है।
पार्टी के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार प्रचार-प्रसार पर तो करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन आत्मानंद स्कूलों के लिए नियमित और पर्याप्त बजट जारी नहीं किया जा रहा है। पार्टी के प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने बताया कि इन स्कूलों को मिलने वाली राशि में कटौती की गई है, जिसके चलते कई विद्यालयों के बंद होने की आशंका उत्पन्न हो गयी है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है, बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया जा सका है, जिसके चलते नोटिस दिए गए हैं। साथ ही, बच्चों को ड्रेस और किताबें नहीं मिल पा रही हैं और प्रयोगशालाओं समेत अन्य शैक्षणिक गतिविधियां संसाधनों के अभाव में ठप पड़ी हैं।
श्री आलम ने रायपुर के आत्मानंद स्कूलों को मिले बिजली बिल के नोटिस, राजनांदगांव में शिक्षकों के खाली पदों और कम फंड, तथा बस्तर संभाग में संसाधनों की भारी कमी को प्रदेश भर के स्कूलों की बदहाली के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ ने गरीब बच्चों के लिए निजी निजी में आरक्षित सीटों में भारी कटौती पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि हाल ही में सरकार ने आरटीई के तहत 44,173 सीटों की तुलना में मात्र 19,466 सीटों पर ही प्रवेश देने का निर्णय लिया है, जिससे 24 हजार से अधिक सीटें समाप्त कर दी गई हैं। जोसेफ ने आरोप लगाया कि पहले आरटीई के तहत नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 कक्षाओं में भी प्रवेश दिया जाता था, लेकिन अब नियम बदलकर सीधे कक्षा पहली में ही प्रवेश अनिवार्य कर दिया गया है। इस बदलाव से गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें अपने बच्चों को प्रारंभिक कक्षाओं में निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए भारी फीस चुकानी पड़ेगी।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय कुमार झा ने सरकार पर शिक्षा के प्रति लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध तरीके से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। झा ने बताया कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर प्रदेश में 10 हजार स्कूल बंद किए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की स्थिति और खराब हुई है। उन्होंने कहा कि करीब 50 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं, जबकि सरकार नई भर्ती नहीं कर रही है। झा ने आरोप लगाया कि सरकार मुफ्त सरकारी शिक्षा को कमजोर कर निजी विद्यालयों को बढ़ावा दे रही है और यह सरकार शिक्षा विरोधी है।
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