(संजय कौशिक)मोतिहारी , अक्टूबर 17 -- बिहार के सर्वाधिक आबादी वाले जिलों में दूसरे और क्षेत्रफल में तीसरे स्थान पर रहने वाला पूर्वी चंपारण प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य के 38 जिलों में 34वें पायदान पर है। बिहार के 20वें आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े जिले के विकास की एक विरोधाभासी तस्वीर पेश करते हैं। बड़ी आबादी, व्यापक कृषि क्षेत्र और भारत-नेपाल सीमा पर महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति के बावजूद जिले की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से काफी नीचे है। यह स्थिति आर्थिक विकास की दिशा, रोजगार के अवसरों और उत्पादन से होने वाले लाभ को आम लोगों तक पहुंचाने की चुनौती को रेखांकित करती है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, पूर्वी चंपारण की आबादी 50,99,371 और भौगोलिक क्षेत्रफल 3,968 वर्ग किलोमीटर है। इतनी बड़ी आबादी और व्यापक आर्थिक संभावनाओं वाले जिले का प्रति व्यक्ति आय के मामले में पिछड़ना इस सवाल को महत्वपूर्ण बनाता है कि यहां उपलब्ध संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों का लाभ लोगों की आय में अपेक्षित वृद्धि क्यों नहीं कर पा रहा है।

केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में 30 मार्च 2026 को प्रस्तुत जिलावार आंकड़ों के अनुसार, स्थिर मूल्य (2011-12) पर प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद के मामले में पटना 1,31,332 रुपये के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि पूर्वी चंपारण 22,300 रुपये के साथ 34वें स्थान पर रहा। राज्य के 38 जिलों में इस स्थान का अर्थ है कि जिले से नीचे केवल चार जिले हैं।

वर्तमान कीमतों पर भी जिले की स्थिति राज्य के अग्रणी जिलों से काफी पीछे है। बिहार के 20वें आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, पटना का प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद 2,41,220 रुपये, जबकि पूर्वी चंपारण का 44,992 रुपये है। इस आधार पर पटना का आंकड़ा पूर्वी चंपारण से लगभग 5.36 गुना है। दोनों जिलों के बीच प्रति व्यक्ति आय का अंतर 1,96,228 रुपये है।

वर्तमान कीमतों पर बिहार की प्रति व्यक्ति औसत आय 76,490 रुपये है। इसके मुकाबले पूर्वी चंपारण का आंकड़ा 44,992 रुपये है। इस तरह जिले की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से 31,498 रुपये कम है। यह अंतर स्पष्ट करता है कि पूर्वी चंपारण के सामने चुनौती केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की नहीं, बल्कि उनकी उत्पादकता और उनसे होने वाले लाभ को व्यापक आबादी तक पहुंचाने की भी है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार की कुल आबादी में पूर्वी चंपारण की हिस्सेदारी लगभग 4.90 प्रतिशत थी। 3,968 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ पश्चिम चंपारण और गया के बाद यह राज्य का तीसरा सबसे बड़ा जिला है। इतनी बड़ी आबादी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, सिंचाई, पेयजल और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यापक जरूरत है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर पर्याप्त और उत्पादक रोजगार के अवसर पैदा करना भी जरूरी है, जिससे आर्थिक विकास का लाभ जिले के अधिकाधिक लोगों तक पहुंच सके।

हालांकि, बड़ी आबादी और विशाल क्षेत्रफल अपने आप कम प्रति व्यक्ति आय का कारण नहीं होते। आय का स्तर उत्पादन, श्रम उत्पादकता, निवेश, रोजगार की प्रकृति, औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों के वितरण जैसे कई कारकों से प्रभावित होता है। इसलिए जिले की आर्थिक स्थिति को इन पहलुओं के समग्र संदर्भ में देखना होगा।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले पूर्वी चंपारण में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण और विपणन की बेहतर व्यवस्था के साथ ग्रामीण उद्यमों तथा लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देकर स्थानीय रोजगार और आय बढ़ाने की संभावनाएं हैं। उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में निवेश, कौशल विकास और रोजगारपरक गतिविधियों का विस्तार भी इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े जिले की आर्थिक क्षमता और प्रति व्यक्ति आय के मौजूदा स्तर के बीच के अंतर को सामने रखते हैं। आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से राज्य में अग्रणी पूर्वी चंपारण के लिए वास्तविक विकास की कसौटी यही होगी कि उपलब्ध संसाधन, कृषि उत्पादन और अन्य आर्थिक गतिविधियां कितनी तेजी से रोजगार, उत्पादकता और आम लोगों की आय में वृद्धि का आधार बनती हैं।

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