चंडीगढ़ , सितंबर 02 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने आम आदमी पार्टी पर 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के मुद्दे पर दोहरी और अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि आप ने राजनीतिक सुविधा के लिए कांग्रेस का साथ दिया और अब 1984 के पीड़ितों के नाम पर प्रदर्शन कर रही है।

श्री चुघ ने कहा कि आप को मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में प्रदर्शन करने से पहले अपने 2017 के चुनावी घोषणापत्र का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आप ने 1984 के पीड़ित परिवारों को पांच लाख रुपये मुआवजा, किफायती आवास और सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के वर्षों बाद भी ये वादे पूरे नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार जब मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलने पहुंचे तो उन्हें सहानुभूति के बजाय पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की पीड़ा को चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल करना उनके साथ अन्याय है।

भाजपा सांसद ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने 1984 के मामलों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, बंद मामलों को दोबारा खोला गया और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी। उन्होंने कहा कि इसी प्रक्रिया के तहत पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराया गया और अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई।

श्री चुघ ने दावा किया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1984 के पीड़ित परिवारों को कुल 3,465 नौकरियां दी गयीं, जिनमें दिल्ली सरकार की ओर से 36, केंद्र सरकार की ओर से 338 और हरियाणा सरकार की ओर से 121 नियुक्तियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति न्याय और पुनर्वास पर आधारित है, जबकि आप ने पीड़ित परिवारों से किए वादे पूरे नहीं किये।

राज्यसभा सांसद ने ईडी की जांच का हवाला देते हुए आप के 'जीरो करप्शन' के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों द्वारा तबादलों-पोस्टिंग, सरकारी फाइलों और प्रशासनिक प्रभाव से संबंधित कथित नेटवर्क के बारे में सामग्री सामने आयी है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान नितिन गोहल के परिसर से कथित तौर पर 20.98 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी, व्हाट्सऐप चैट और सरकारी दस्तावेजों से संबंधित सामग्री मिलने की बात सामने आयी है।

श्री चुघ ने कहा कि ये आरोप गंभीर हैं और मुख्यमंत्री भगवंत मान को इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़कर पंजाब की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित