नयी दिल्ली , सितम्बर 17 -- राष्ट्रीय कैडेट कोर के 72,000 से ज़्यादा कैडेटों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वेच्छा से विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के साथ-साथ ज़रूरी सेवाओं को बनाए रखने में मदद की।

रक्षा मंत्रालय की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार इन कैडेटों ने ड्रोन और साइबर सुरक्षा जैसी नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रशिक्षण भी लिया। कैडेटों को संतरी और गार्ड ड्यूटी, परोक्ष वायु रक्षा , घायलों को निकालने, नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने, भीड़ और यातायात प्रबंधन , प्राथमिक उपचार शिविर, मॉक और सायरन ड्रिल और फील्ड डिफेंस की तैयारी के लिए तैनात किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने सिविल अधिकारियों की मदद की और राज्य के प्रशासन तथा स्थानीय सैन्य इकाईयों के साथ तालमेल भी बढाया।

कैडेटों ने सिविल डिफेंस पहलों के तहत रक्तदान शिविर में भी हिस्सा लिया। इस संचालन अनुभव के साथ-साथ, एनसीसी ने प्रौद्योगिकी पर आधारित सुरक्षा और सिविल सेक्टर के लिए कैडेट तैयार करने के लिए अपने प्रशिक्षण ढांचे का विस्तार किया है, जिसमें ड्रोन टेक्नोलॉजी और साइबर ट्रेनिंग मुख्य फोकस वाले क्षेत्र हैं।

एनसीसी ने ड्रोन प्रशिक्षण को अपने प्रशिक्षण ढांचे का एक मुख्य हिस्सा बना दिया है। कई एनसीसी निदेशालय में ड्रोन के बुनियादी संचालन, रिमोट पायलट सर्टिफिकेट ट्रेनिंग और एडवांस्ड फ्लाइंग स्किल्स को कवर करने वाले व्यवस्थित मॉड्यूल शुरू किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 2,400 से ज़्यादा कैडेट और 200 इंस्ट्रक्टर को ड्रोन टेक्नोलॉजी में ट्रेनिंग दी जा चुकी है। एनसीसी अपनी संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए ड्रोन प्रतियोगिताएं भी शुरू कर रहा है और रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन की सुविधाएं विकसित कर रहा है।

इस पहल का मकसद कैडेटों को ऐसे कौशल से लैस करना है जो रक्षा और तेज़ी से बढ़ते सिविल ड्रोन सेक्टर, दोनों में काम आ सकें।

एनसीसी ने गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई 4 सी) के साथ मिलकर अपने साइबर ट्रेनिंग प्रोग्राम को मज़बूत करना भी शुरू कर दिया है।कैडेटों ने सालाना प्रशिक्षण शिविर और संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के ज़रिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों और कार्यशाला में साइबर स्वयंसेवक के तौर पर हिस्सा लिया है।

यह संगठन एनसीसी को 'नेशनल साइबर कैडेट कोर' में बदलने के लिए एक लंबी अवधि की योजना पर भी काम कर रहा है, ताकि साइबर-रिस्पॉन्स की बेहतर क्षमताओं के साथ देश के साइबर सिक्योरिटी इकोसिस्टम में योगदान दिया जा सके।

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