रुद्रपुर , अगस्त 06 -- उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने गुरुवार को कहा कि आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी, नियमित प्रशिक्षण और त्वरित प्रतिक्रिया ही सबसे बड़ी ताकत है। श्री कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने तथा आपदा के दौरान रिस्पॉन्स टाइम कम करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
रुद्रपुर में आपदा जोखिम न्यूनीकरण विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड ने पिछले वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब प्रदेश के सभी जिलों में कार्यशालाओं के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि आपदा के समय उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान किस क्रम में क्या कार्रवाई करनी है, इसके लिए सभी संबंधित विभागों और कार्मिकों का प्रशिक्षित एवं तैयार होना आवश्यक है। बेहतर आपदा प्रबंधन के लिए सामुदायिक सशक्तिकरण भी बेहद जरूरी है। इस दिशा में आपदा प्रबंधन विभाग लगातार नई तकनीकों को अपनाने और आधुनिक तंत्र विकसित करने का कार्य कर रहा है।
राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने अधिकारियों से कार्यशाला को गंभीरता से लेने का आह्वान करते हुए कहा कि विशेषज्ञों के अनुभव और सुझावों का लाभ उठाकर आपदा के समय त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी आपदा प्रबंधन को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं और आपदा की स्थिति में स्वयं मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करते हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) रघुवीर सिंह भंडारी ने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों तथा अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं जवानों को राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है, जिससे उनके अनुभव का लाभ आपदा प्रबंधन में मिल सके।
इसी प्रकार आपदा प्रबंधन के अपर सचिव प्रकाश चन्द्र ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राज्यव्यापी क्षमता विकास अभियान चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 18 जुलाई को टिहरी गढ़वाल से हुई थी। आगामी चरणों में नैनीताल, चमोली, देहरादून, पिथौरागढ़ सहित अन्य जिलों में भी प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
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