बेंगलुरु , अप्रैल 09 -- भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को कहा कि आधुनिक युद्ध अब पारंपरिक युद्ध के मैदानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बहुक्षेत्रीय मुकाबला बन गया है, जहाँ नागरिक बुनियादी ढांचे , निजी उद्योग और समाज खुद युद्ध का अहम हिस्सा हैं और साथ ही संभावित लक्ष्य भी हैं।
जनरल द्विवेदी ने रण संवाद 2026 कार्यक्रम में इस बात पर ज़ोर दिया कि आज संघर्ष की प्रकृति साइबर, अंतरिक्ष , इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और बौद्विक जैसे क्षेत्र तक फैला हुआ है, जिससे युद्ध और शांति के बीच की लाइनें धुंधली हो रही हैं। उन्होंने कहा कि नागरिक सैन्य एकीकरण अब वैकल्पिक नहीं बल्कि ज़रूरी है, और इसे क्षेत्र आधारित तरीके से किया जाना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा का समर्थन करने में कई तरह के उद्योग शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी , अंतरिक्ष , आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, डेटा सेंटर, रक्षा विनिर्माण , एयरोस्पेस, लॉजिस्टिक्स, तेल एंड गैस, बैंकिंग एंड फाइनेंस, तट, हवाईअड्डा , ऊर्जा और संवाद जैसे क्षेत्र मल्टी-डोमेन ऑपरेशन (एमडीओ) से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि आजकल की लड़ाइयों में, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर से सीखे गए ऑपरेशनल सबक भी शामिल हैं, सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे खासकर रसद और कम्युनिकेशन नेटवर्क के बीच तालमेल ने ऑपरेशनल असर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने आगाह किया कि इन क्षेत्र का रक्षा ढांचे में गहराई से एकीकरण होने से उनमें जोखिम भी बढ़ जाता है, क्योंकि लड़ाइयों के दौरान ज़रूरी नागरिक बुनियादी ढांचे लक्ष्य बन सकते हैं। दुनिया भर के उदाहरण देते हुए, उन्होंने डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का ज़िक्र किया और कहा कि आधुनिक युद्ध तेज़ी से ऐसे सम्पतियों तक फैल रहा है।
जनरल द्विवेदी ने ज़ोर दिया कि हमला और रक्षात्मक उपाय दोनों क्षमताओं को एक साथ विकसित होना चाहिए, जिसमें रक्षा की तैयारी संचालन योजना का एक अहम हिस्सा बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि एमडीओ पारिस्थितिकी का हिस्सा बनने वाले हर सेक्टर की योजना प्रक्रिया में रक्षा से जुड़ी बातों को शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि एकीकरण के साथ कमजोरी का स्तर बढ़ता है।
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