दरभंगा , मई 18 -- मैथिली भाषा के प्रख्यात विद्वान डॉ. शांतिनाथ सिंह ठाकुर नेसोमवार को कहा कि आधुनिक मैथिली साहित्य में ऐतिहासिक और काव्यशास्त्रीय शोध की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन इस दिशा में अभी गंभीर और गहन अनुसंधान की आवश्यकता है।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर मैथिली विभाग में सोमवार को "आधुनिक मैथिली भाषा साहित्य में अनुसंधान की दशा और दिशा" विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान को संबोधित करते हुए डॉ. ठाकुर ने मैथिली अनुसंधान के अनेक अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाकवि विद्यापति की रचनाओं को मुख्यतः तीन वर्गों भक्ति विषयक, श्रृंगारिक विषयक तथा व्यावहारिक विषयक में विभाजित किया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से महाकवि विद्यापति और चंदा झा की पदावलियों के काव्यशास्त्रीय एवं ऐतिहासिक अध्ययन को समय की मांग बताया।

डॉ.ठाकुर ने शोधपरक तथ्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि विद्यापति के 'व्यवहार गीत' तत्कालीन समाज की महिलाओं के लोककंठ में सुरक्षित थे, लेकिन पर्दा प्रथा जैसी सामाजिक रूढ़ियों के कारण शोधार्थी उन तक प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहुंच सके। परिणामस्वरूप इन गीतों का व्यवस्थित संकलन और संरक्षण नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि आज जो सामग्री उपलब्ध है, वह मुख्यतः पुरुष वर्ग के माध्यम से शोधकर्ताओं तक पहुंच सकी।

डॉ. ठाकुर ने विद्यापति द्वारा रचित 'उचिती गीतों' का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्यिक अनुसंधान के लिए इतिहास का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ऐतिहासिक दृष्टिकोण से शोध कार्य करने पर बल देते हुए कहा कि कवि लोचन के दरबार में अनेक उत्कृष्ट संगीत रचनाएं तैयार हुईं, जिनकी चर्चा आज विदेशों तक में हो रही है। साथ ही उन्होंने मैथिली भाषा और साहित्य के विकास में विभिन्न रियासतों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।

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