भोपाल , मार्च 14 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की 'सारा' और 'उन्नति' एग्री-जीआईएस प्रणाली के माध्यम से उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा मशीन लर्निंग से विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी और उत्पादन आंकलन को वैज्ञानिक आधार मिला है और किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तथा समयबद्ध तरीके से मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि 'उन्नति' प्लेटफॉर्म और 'सारा' एप्लिकेशन के माध्यम से क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। डीप लर्निंग तकनीक से प्राप्त लाखों तस्वीरों का विश्लेषण कर खेत स्तर पर बोई गई फसलों के प्रकार का सत्यापन किया जा रहा है, जिससे फसलों की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन संभव हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट क्रॉप मैपिंग के लिए उपग्रह चित्रों और उन्नत मॉडल का उपयोग कर भूमि खंड स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। साथ ही अधिसूचित फसलों के लिए पटवारी हल्का स्तर पर उपज का पूर्वानुमान भी लगाया जा रहा है, जिससे कृषि योजना निर्माण, खाद्यान्न खरीद व्यवस्था और फसल बीमा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में फसल पहचान की सटीकता जहां लगभग 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर करीब 85 प्रतिशत हो गई है। हाल के रबी और खरीफ सीजन में इस प्रणाली के माध्यम से पांच करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है तथा तीन करोड़ से अधिक भूमि खंडों की डिजिटल मैपिंग की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित यह प्रणाली किसानों, सर्वेक्षकों और फसल बीमा कंपनियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है और इससे प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में फसल नुकसान का समय पर आकलन भी संभव होगा।

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