लखनऊ , जनवरी 29 -- उत्तर प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम फैसला लिया है। नई नियमावली के तहत अब दस्तावेज पंजीकरण के समय आधार संख्या धारकों की पहचान ई-केवाईसी के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और आधार आधारित ई-हस्ताक्षर को ई-निष्पादन की परिभाषा में शामिल किया गया है।
स्टाम्प तथा पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने इसकी जानकारी दी । उन्होंने बताया कि विधानभवन में आयोजित प्रेसवार्ता में विभाग से संबंधित दस्तावेजों के ऑनलाइन पंजीकरण और आधार प्रमाणीकरण की नई व्यवस्था की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 28 अगस्त को संपन्न स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में संपत्ति पंजीकरण के दौरान छद्म व्यक्तियों द्वारा कराई जा रही रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।
श्री जायसवाल ने बताया कि इन्हीं निर्देशों के क्रम में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-69 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली को लागू किया गया है।
राज्य मंत्री ने बताया कि 01 फरवरी 2026 से आधार प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। इसके बाद संपत्ति पंजीकरण के समय पक्षकारों और गवाहों की पहचान का सत्यापन अनिवार्य रूप से आधार के जरिए किया जाएगा।
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