भोपाल , अक्टूबर 04 -- आधार नहीं होने या उससे जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण किसी भी बच्चे को आंगनवाड़ी, मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति और अन्य अधिकारों से वंचित नहीं किए जाने की मांग की गई है। बच्चों के भोजन और पोषण के अधिकार पर भोपाल में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय अधिवेशन में बच्चों के लिए फेस रिकग्निशन, ई-केवाईसी और अनिवार्य ऐप जैसी व्यवस्थाओं को बंद करने तथा आंगनवाड़ी और स्कूलों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्री से गर्म पका भोजन दिए जाने की मांग भी उठी।

तीन दिवसीय अधिवेशन के अंतिम दिन जारी घोषणा में बच्चों के भोजन और पोषण से जुड़ी सरकारी योजनाओं के निजीकरण और व्यावसायीकरण को रोकने, आईसीडीएस और पीएम पोषण का प्रभावी सामाजिक अंकेक्षण करने, आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या बढ़ाने तथा उनकी बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने की मांग की गई। स्कूलों के आसपास 200 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री रोकने और स्कूलों में किचन गार्डन बनाने की मांग भी की गई।

घोषणा में मातृत्व लाभ को सार्वभौमिक और बिना शर्त सामाजिक सुरक्षा अधिकार बनाने तथा असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को पर्याप्त मातृत्व अवकाश और आय सहायता देने की मांग की गई। विस्थापित, प्रवासी, बेघर और सड़कों पर रहने वाले बच्चों के लिए पहचान और पते की बाध्यता के बिना भोजन, पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। जरूरत वाले क्षेत्रों में सालभर चलने वाले आश्रय और सामुदायिक रसोई तथा प्रवासी परिवारों के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी, क्रेच और स्कूल की व्यवस्था की मांग भी की गई।

अधिवेशन में राष्ट्रीय स्तर पर 'आंगनवाड़ी ठीक करो' अभियान चलाने, बच्चों के भोजन के अधिकार पर विभिन्न राज्यों में अधिवेशन आयोजित करने और इस अधिकार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साझा कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।

आइकफ आश्रम में 02 से 04 अक्टूबर तक आयोजित अधिवेशन में 18 राज्यों के 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। तीन दिनों में कुपोषण और भूख, आंगनवाड़ी, मध्याह्न भोजन, मातृ एवं बाल पोषण, भेदभाव, विस्थापन, डिजिटलीकरण, खाद्य योजनाओं के निजीकरण, कृषि, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

अधिवेशन में प्रख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, सीटू की राष्ट्रीय सचिव एवं ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स की महासचिव ए. आर. सिंधु, राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा, विधायक ओंकार मरकाम सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और विभिन्न राज्यों के जमीनी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। घोषणा-पत्र पर हुई चर्चा में कविता श्रीवास्तव, माधुरी कृष्णास्वामी, आशा मिश्रा, आयशा और राजशेखर सहित भोजन के अधिकार अभियान से जुड़े वरिष्ठ साथियों और विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

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