धार , फरवरी 9 -- मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल्य जिले धार में उल्लास और उमंग के पर्व भगोरिया की शुरुआत 24 फरवरी से होने जा रही है। करीब एक सप्ताह तक जिले के विभिन्न हाट बाजारों में भगोरिया की रौनक देखने को मिलेगी। होलिका दहन के बाद 2 मार्च को अंतिम भगोरिये के साथ इस पारंपरिक पर्व का समापन होगा। आदिवासी समाज को पूरे वर्ष भगोरिया का बेसब्री से इंतजार रहता है।

जिले के कुक्षी, मनावर, उमरबन, तिरला, गुजरी, बाकानेर और रिंगनोद क्षेत्र में बड़े हाट बाजार लगते हैं। जिले का एकमात्र ब्लॉक डही ऐसा है, जहां अलग-अलग गांवों में भगोरिया का आयोजन होता है। धार जिले में कुल 59 स्थानों पर भगोरिया पर्व मनाया जाएगा। इंदौर संभाग में सबसे अधिक भगोरिया आयोजन धार जिले में ही होते हैं।

भगोरिया से पहले 17 से 23 फरवरी तक साप्ताहिक हाट बाजार 'त्योहारिया हाट' के रूप में लगेंगे। पर्व में शामिल होने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य क्षेत्रों में मजदूरी और नौकरी करने गए आदिवासी परिवार अपने गांवों की ओर लौटने लगेंगे। भगोरिया और हाट बाजार के दौरान जनजातीय बंधु कपड़े, आभूषण, शृंगार सामग्री और घरेलू जरूरतों की खरीदारी करते हैं।

भगोरिया के अवसर पर जनप्रतिनिधियों की भी मौजूदगी रहती है। भाजपा और कांग्रेस द्वारा मंच लगाए जाते हैं। विभिन्न गांवों से मांदल लेकर टोलियां हाट बाजार और भगोरिया में पहुंचती हैं। मांदल की थाप पर नृत्य के बाद इन टोलियों का सम्मान किया जाता है और नगद पुरस्कार भी दिए जाते हैं। आदिवासी परिवार मांदल बनाने की तैयारी एक से डेढ़ माह पहले ही शुरू कर देते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भगोरिया के दौरान जिन गांवों में आयोजन होगा, वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। स्थानीय पुलिस सरपंच और सचिव के साथ समन्वय कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेगी। असामाजिक तत्वों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।

धार के एएसपी विजय डावर ने बताया कि जहां-जहां भगोरिया का आयोजन होगा, वहां पुलिस टीम सुबह से ही तैनात रहेगी। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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